वाराणसी , फरवरी 13 -- महामना मदन मोहन मालवीय की तपोभूमि काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्मविज्ञान संकाय में पहली बार 'काशीनेपालशास्त्रसङ्गम:' का आयोजन हुआ। द्विदिवसीय इस संगम का उद्घाटन वैदिक एवं पौराणिक मंगल उद्घोष के साथ शुक्रवार को संकाय के सभागार में सम्पन्न हुआ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए समस्त कार्यक्रम के परिकल्पक व सूत्रधार संकाय प्रमुख प्रो. राजाराम शुक्ल ने भारत एवं नेपाल के भौगोलिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक एवं पारिवारिक सम्बन्धों की प्राचीनता, दृढ़ता एवं महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि बाबा विश्वनाथ के क्षेत्र काशी में जिस प्रकार प्राचीनकाल से ही शास्त्रों के पठन-पाठन एवं शास्त्रार्थ की परम्परा रही है उसी प्रकार बाबा पशुपतिनाथ के क्षेत्र नेपाल में भी रही है।

नेपाल की वैदुष्य परम्परा में काशी का तथा काशी की वैदुष्य परम्परा में नेपाल का अतुल्य योगदान रहा है और आज भी है। दोनों राष्ट्रों की एकता एवं समृद्धि के लिये हमें इस परम्परा को और आगे बढ़ाना चाहिए।

कार्यक्रम के मुख्यातिथि काशी के श्रीअन्नपूर्णा मठ-मन्दिर के महन्त स्वामी श्री शंकर पुरी जी महाराज ने धार्मिक दृष्टि से काशी एवं नेपाल के तीर्थ क्षेत्रों पर प्रकाश डाला तथा बताया कि द्वादश ज्योतिर्लिंगों में अन्यतम ज्योतिर्लिंग केदारनाथ जी का दर्शन बाबा पशुपतिनाथ जी के दर्शन के बिना अपूर्ण है। दोनों मिलकर ही पूर्ण ज्योतिर्लिंग बनते है।

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