वाराणसी , जनवरी 15 -- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी-बीएचयू) के प्रतिष्ठित सामाजिक-सांस्कृतिक महोत्सव 'काशीयात्रा 2026' का भव्य शुभारंभ गुरुवार को स्वतंत्रता भवन में हुआ। उद्घाटन समारोह साहित्य, संगीत, कला और सृजनात्मक अभिव्यक्ति का जीवंत उत्सव बन गया, जिसने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
स्पिक मैके के तत्वावधान में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित श्री तारापदा रजक ने पश्चिम बंगाल के पारंपरिक पुरुलिया छऊ नृत्य की सशक्त प्रस्तुति दी। युद्धकला के तत्वों, पारंपरिक मुखौटों और पौराणिक कथानकों से सुसज्जित इस नृत्य ने भारत की समृद्ध अमूर्त सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप से उजागर किया और दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
इसके बाद राष्ट्रीय तानसेन पुरस्कार (2025) एवं संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित विश्वविख्यात संतूर वादक पंडित तरुण भट्टाचार्य की मनमोहक संतूर प्रस्तुति हुई। उनकी आत्मीय और मधुर रचनाओं ने सभागार को दिव्य अनुभूति से भर दिया और युवा अभियंताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम में आधुनिकता का रंग भरते हुए टेक्नो इल्यूजनिस्ट राहुल खरबंदा ने अत्याधुनिक दृश्य प्रभावों, लेजर तकनीक और रोमांचक जादुई करतबों से सजा भव्य इल्यूजन शो पेश किया। पारंपरिक जादू और आधुनिक तकनीक के इस अनूठे संगम की दर्शकों ने तालियों से भरपूर सराहना की।
इससे पूर्व महोत्सव का औपचारिक उद्घाटन आईआईटी (बीएचयू) के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने दीप प्रज्ज्वलन के माध्यम से किया। इस अवसर पर डीन (छात्र कार्य) प्रो. राजेश कुमार भी उपस्थित रहे। अपने संबोधन में प्रो. पात्रा ने कहा कि काशीयात्रा केवल एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि छात्रों में सृजनात्मकता, नवाचार और सांस्कृतिक चेतना को प्रोत्साहित करने वाला सशक्त मंच है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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