जालौन , फरवरी 6 -- यमुना तट पर बसी ऐतिहासिक नगरी कालपी अपनी समृद्ध धार्मिक परंपरा और पौराणिक विरासत के कारण विशेष पहचान रखती है। यहां भगवान शिव के नौ पौराणिक स्वरूपों की सामूहिक उपासना की अनूठी परंपरा प्रचलित है, जिन्हें स्थानीय रूप से "नवेश्वर" कहा जाता है।
नगर के विभिन्न मोहल्लों, घाटों और प्राचीन स्थलों पर स्थित ये नौ शिवालय आस्था के केंद्र होने के साथ-साथ कालपी की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर के जीवंत प्रमाण भी हैं। वरिष्ठ इतिहासकार हरीमोहन पुरवार के अनुसार, नवेश्वरों का प्रातः स्मरण और दर्शन जीवन के भय और कष्टों से मुक्ति प्रदान करता है।
नवेश्वर परंपरा का आध्यात्मिक आधार अंक 'नौ' की पूर्णता से जुड़ा है। हिंदू शास्त्रों में नवदुर्गा, नवग्रह और नवविधा भक्ति की तरह नौ स्वरूपों की उपासना को समग्र साधना का प्रतीक माना गया है। कालपी के किले के समीप यमुना तट पर स्थित पातालेश्वर महादेव को नवेश्वरों में सर्वाधिक प्राचीन और पूजनीय माना जाता है। ब्रह्माण्ड पुराण में इसका उल्लेख मणिकेश्वर नाम से मिलता है। षट्भुजी गुम्बद, अष्टकोणीय गर्भगृह और बलुआ पत्थर की नक्काशी इसकी भव्यता को दर्शाती है। मान्यता है कि द्रोणाचार्य ने यहीं शिव आराधना कर पुत्र प्राप्ति का वरदान पाया था।
इसी क्रम में ढोढ़ेश्वर, फालेश्वर और लुढ़केश्वर महादेव मंदिर अपनी विशिष्ट मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध हैं। ढोढ़ेश्वर मंदिर की स्थापना लगभग एक शताब्दी पूर्व हुई मानी जाती है, जहाँ विभिन्न देवी-देवताओं की मूर्तियाँ धार्मिक समन्वय का संदेश देती हैं। फालेश्वर महादेव को मनोकामना पूर्ण करने वाला और लुढ़केश्वर महादेव को लुढ़ककर दर्शन करने की परंपरा से जोड़ा जाता है। वहीं राजघाट के निकट बानेश्वर और आगापुर स्थित तिगड़ेश्वर महादेव मंदिर श्रद्धालुओं को भय और संकट से मुक्ति का आश्वासन देते हैं।
रावगंज के गोपेश्वर, रामेश्वर तथा अदलसराय के भोलेश्वर महादेव मंदिर इस परंपरा को पूर्णता प्रदान करते हैं। गोपेश्वर मंदिर गोपियों की आराधना से जुड़ा माना जाता है, जबकि रामेश्वर में शिवलिंग के दर्शन से राम और शिव दोनों की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। भोलेश्वर महादेव सरलता और निष्कपट भक्ति का प्रतीक हैं। आकार और स्वरूप में भिन्न होते हुए भी ये सभी मंदिर कालपी को "नवेश्वर महादेवों की नगरी" के रूप में प्रतिष्ठित करते हैं, जहाँ आस्था, इतिहास और संस्कृति का अद्भुत संगम आज भी जीवंत है।
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