नयी दिल्ली , फरवरी 04 -- राज्यसभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन ने बुधवार को स्पष्ट किया कि सदन में नियम 267 के तहत कार्य स्थगन प्रस्ताव के केवल वही नोटिस स्वीकार किये जा सकते हैं जो बेहद अत्यंत महत्वपूर्ण और आपात स्थिति से जुड़े हों। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के डा जॉन ब्रिटास ने शून्यकाल के दौरान सभापति से जानना चाहा कि उन्होंने सभी विधायी कामकाज रोककर भारत अमेरिका व्यापार समझौते पर चर्चा कराने के लिए नियम 267 के तहत जो नोटिस दिया था उसका क्या हुआ। सभापति ने कहा कि उनका नोटिस स्वीकार नहीं किया गया है। सदस्य के बार-बार प्रतिवाद करने पर उन्होंंने कहा कि सदन में नियम 267 के तहत केवल वही मुद्दे उठाये जा सकेंगे जो अत्यंत महत्वपूर्ण और आपात स्थिति से जुड़े हों। उन्होंने कहा कि वह पहले भी इस बारे में व्यवस्था दे चुके हैं। सदस्य की टिप्पणी पर उन्होंने कहा कि वह आसन को चुनौती नहीं दे सकते।
सदस्य के बार बार यह मुद्दा उठाने पर उन्होंने कहा कि आपकी सहायता नहीं की जा सकती।
इससे पहले कांग्रेस के प्रमोद तिवारी ने व्यवस्था का सवाल उठाते हुए कहा कि वाणिज्य मंत्री ने संसद सत्रके दौरान भारत अमेरिका समझौते के बारे में मंगलवार को संवाददाता सम्मेलन आयोजित कर जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि यह संसद के नियमों और परंपराओं का उल्लंघन है।
इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सदस्य सही कह रहे हैं कि यह संसद की परंपरा है। उन्होंने कहा कि साथ ही इस बात पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि सरकार संसद में वक्तव्य देने के लिए तैयार थी लेकिन लोकसभा की स्थिति को देखते हुए ऐसा नहीं किया जा सका और आज दोनों सदनों में इस संबंध में वक्तव्य दिया जायेगा।
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