रामनगर , जनवरी 30 -- उत्तराखंड के रामनगर में स्थित कार्बेट टाइगर रिजर्व द्वारा मरचूला क्षेत्र में एक दिवसीय रामगंगा कॉन्वर्जेन्स सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य रामगंगा नदी के संरक्षण, संवर्धन, जल गुणवत्ता में सुधार, जल प्रदूषण की रोकथाम तथा जलीय जीवों की जैव विविधता के अध्ययन एवं संरक्षण पर व्यापक मंथन करना रहा।

सम्मेलन में विशेषज्ञों ने आधुनिक तकनीक के माध्यम से रामगंगा नदी और उससे जुड़ी जैव विविधता के निरंतर अनुश्रवण तथा डेटा आधारित संरक्षण रणनीति पर जोर दिया। साथ ही जन-सहभागिता को इस अभियान की सबसे मजबूत कड़ी बताते हुए इसे जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

पूर्वाह्न सत्र में विशेषज्ञों द्वारा चार तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें प्रेजेंटेशन के माध्यम से रामगंगा नदी की वर्तमान स्थिति, चुनौतियां और समाधान प्रस्तुत किए गए,इन सत्रों में नदी के साथ-साथ उसकी सहायक नदियों के विस्तृत सर्वेक्षण, जल गुणवत्ता निगरानी और प्रदूषण के स्रोतों पर गहन चर्चा की गई,विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए जन-जागरूकता, ग्राम पंचायतों, नगरपालिकाओं, स्वयंसेवी संस्थाओं और जिला प्रशासन के बीच मजबूत समन्वय अत्यंत आवश्यक है।

अपराह्न सत्र में निदेशक कार्बेट टाइगर रिजर्व डॉ. साकेत बडोला की अध्यक्षता में विशेषज्ञों के साथ एक खुली चर्चा आयोजित की गई। इस चर्चा में रामगंगा नदी को उसके प्राकृतिक स्वरूप में पुनः स्थापित करने, आधुनिक तकनीक के जरिए प्रदूषण उन्मूलन, तथा जन-भागीदारी से जैव विविधता संरक्षण जैसे विषयों पर ठोस सुझाव सामने आए। सभी विशेषज्ञों की सहमति से रामगंगा संरक्षण हेतु एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर,तैयार करने का निर्णय लिया गया।

इसके तहत तकनीकी टीम, फील्ड टीम और विशेषज्ञ टीम का गठन कर क्षेत्र चयन, विस्तृत सर्वेक्षण और डाटा शीट तैयार करने पर सहमति बनी, जिससे भविष्य में संरक्षण कार्यों के लिए एक बेसलाइन डेटाबेस विकसित किया जा सके। जैव विविधता संरक्षण और जलीय जीवों के संरक्षण में रामगंगा नदी की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया।

सम्मेलन की निरंतरता बनाए रखने के लिए सभी विशेषज्ञों, विभागों और संस्थाओं के बीच समन्वय, रणनीति निर्धारण और आगामी कार्यवाही हेतु एक ई-मेल ग्रुप बनाए जाने का भी निर्णय लिया गया।

सम्मेलन में प्रमुख रूप से डॉ. साकेत बडोला निदेशक, कार्बेट टाइगर रिजर्व, तरुण श्रीधरा, आईएफएस, डीएफओ, कालागढ़ टाइगर रिजर्व, लैंसडाउन, डॉ. जे.ए. जॉनसन , सुरेश बाबू (वरिष्ठ निदेशक, विश्व वन्यजीव कोषी (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ), डॉ. मिराज अनवर (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ), डॉ. नीलम रावत (यूएसएसी), डॉ. एच.एस. बर्गली, अजय कुमार व शंकर दत्त (श्रमयोग) सहित वन विभाग एवं विभिन्न संस्थाओं के वरिष्ठ अधिकारी व विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

यह सम्मेलन रामगंगा नदी के दीर्घकालिक संरक्षण की दिशा में एक निर्णायक पहल के रूप में देखा जा रहा है, जिससे आने वाले समय में नदी और उसकी जैव विविधता को सुरक्षित रखने में नई दिशा मिलेगी।

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