भोपाल , फरवरी 1 -- मोदी सरकार द्वारा संसद में पेश किए गए 12वें आम बजट को मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने आम गरीबों, मेहनतकश वर्गों, मजदूरों और किसानों के हितों के खिलाफ बताया है। माकपा मध्यप्रदेश के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने कहा कि यह बजट कारपोरेट घरानों और मुट्ठी भर अमीरों की तिजोरियां भरने वाला है, जबकि आम जनता की जरूरतों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है।
जसविंदर सिंह ने एक विज्ञप्ति में कहा कि सरकार स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू कर किसानों को फसल की लागत का डेढ़ गुना दाम देने और एमएसपी पर सुनिश्चित खरीदी की बात को भूल चुकी है। इसके बजाय कृषि और मंडी व्यवस्था को कारपोरेट कंपनियों के हवाले करने के इरादे इस बजट में साफ दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि जब खेती संकट में है और किसान आत्महत्याएं कर रहे हैं, तब सरकार ने कृषि और इससे जुड़ी गतिविधियों के लिए बजट में कटौती की है। खाद पर मिलने वाली सब्सिडी समाप्त करने के संकेत भी दिए गए हैं, जबकि मनरेगा को यह सरकार पहले ही कमजोर कर चुकी है।
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