कानपुर , मार्च 6 -- उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर में सिविल लाइंस स्थित करीब 24.77 करोड़ रुपये मूल्य की नजूल भूमि को नियमों की अनदेखी कर निजी बिल्डर को बेचे जाने का मामला सामने आने पर जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कड़ी कार्रवाई करते हुए भूमि पर सरकारी पुनर्प्रवेश का आदेश दिया है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार भूखंड संख्या 14/59ए, सिविल लाइंस की उक्त भूमि को पुनः अनावंटित सरकारी संपत्ति के रूप में दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। वर्तमान सर्किल रेट के आधार पर इस भूमि की कीमत लगभग 24 करोड़ 77 लाख रुपये आंकी गई है।
मामले का खुलासा उपजिलाधिकारी सदर, सहायक प्रभारी अधिकारी नजूल तथा तहसीलदार सदर की संयुक्त जांच में हुआ। जांच में पाया गया कि संबंधित नजूल पट्टाधारकों ने कई वर्षों से लीज रेंट जमा नहीं किया और न ही पट्टे का नवीनीकरण कराया। इसके बावजूद कलेक्टर की अनुमति के बिना भूमि को तीसरे पक्ष के पक्ष में विक्रय कर दिया गया।
अभिलेखों के अनुसार नजूल ब्लॉक-14 के प्लॉट संख्या-3 में स्थित इस भूखंड का आवंटन वर्ष 1982 में के.सी. बेरी, तरंग बेरी, नीरज बेरी और विकास बेरी के नाम किया गया था। नजूल मैनुअल के प्रावधानों के अनुसार भवन प्रयोजन के लिए दी जाने वाली ऐसी भूमि सीमित अवधि के पट्टे पर होती है और उसका समय-समय पर नवीनीकरण आवश्यक होता है।
जांच में यह भी सामने आया कि सीता बेरी के उत्तराधिकारियों ने वर्ष 2012 में एसए बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में विक्रय पत्र निष्पादित कर दिया और भूमि को फ्रीहोल्ड दर्शाया, जबकि सरकारी अभिलेखों में इसका कोई प्रमाण नहीं मिला।
जिलाधिकारी ने अपने आदेश में कहा कि बिना लीज रेंट जमा किए, बिना पट्टा नवीनीकरण कराए और बिना कलेक्टर की अनुमति के नजूल भूमि का विक्रय करना नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। नजूल मैनुअल के प्रावधानों तथा शासन से प्राप्त अनुमति के आधार पर जिलाधिकारी ने सार्वजनिक हित में भूखंड पर सरकारी पुनर्प्रवेश का आदेश जारी किया है। आदेश के अनुसार अब यह भूमि पुनः सरकारी खाते में दर्ज की जाएगी तथा इसके रखरखाव और नियंत्रण की जिम्मेदारी सहायक प्रभारी अधिकारी नजूल और तहसीलदार सदर को सौंपी गई है।
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