जौनपुर , दिसम्बर 17 -- जौनपुर जिले के कलेक्ट्रेट परिसर स्थित क्रांति स्तम्भ पर में बुधवार को हिंदुस्तान रिपब्लिकन आर्मी और लक्ष्मीबाई ब्रिगेड के कार्यकर्ताओं ने काकोरी काण्ड के महानायक राजेन्द्र नाथ लाहिड़ी का 98 वां बलिदान दिवस मनाया।
इस अवसर पर कार्यकर्ताओं ने दो मिनट का मौन रखकर आजादी के लड़ाई के पुरोधा एवं काकोरी काण्ड के महानायक श्री लाहिड़ी को श्रद्धांजलि दी।
सभागार में उपस्थित लोगों को सम्बोधित करते हुए अधिवक्ता एवं लक्ष्मी बाई ब्रिगेड की अध्यक्ष मनजीत कौर ने कहा कि महान क्रान्तिकारी राजेन्द्र नाथ लाहिड़ी का जन्म 23 जून 1901 को बंगाल में हुआ था। देश की आजादी की लड़ाई में भाग लेने के लिए उन्होने पंडित राम प्रसाद विस्मिल, रोशन सिंह व अशफाक उल्लाह का साथ किया। चारो महान क्रान्तिकारियों ने उस समय नौ अगस्त 1925 को काकोरी काण्ड को अंजाम दिया तो अंग्रेजों ने चारो को सजा -ए- मौत का आदेश दिया। चारो क्रान्तिकारियों को 19 दिसम्बर सन 1927 को फांसी देने की तिथि तय की गयी , मगर उस समय अंग्रेजों को लगा कि श्री लाहिड़ी इनके अगुवा हैं , ये 19 दिसम्बर के पूर्व जेल में कुछ और करा सकते है, इसके लिए अंग्रेजों ने फांसी की तारीख से दो दिन पूर्व 17 दिसम्बर 1927 को ही काकोरी काण्ड के महानायक श्री लाहिड़ी को उत्तर प्रदेश के गोण्डा जिला कारागार में फांसी पर लटका दिया। ऐसे वीर सपूत को श्रद्धांजलि देना गर्व की बात हैै।
उन्होंने कहा कि काकोरी कांड की बदौलत अंग्रेजी हुकूमत की चूलें हिला देने वाले अमर शहीद राजेन्द्र नाथ लाहिडी ने फांसी के तख्ते पर चढने से पहले जेलर से हंसते हुये कहा था "मैं मर नहीं रहा बल्कि स्वतंत्र भारत में पुनर्जन्म लेने जा रहा हूँ"। फांसी के फंदे को चूमने के बाद लाहिडी की "वंदेमातरम" की गगनभेदी हुंकार से अंग्रेज अधिकारी हिल गये थे। उन्हे एहसास हो गया था कि लाहिड़ी की फाँसी के बाद अब रणबांकुरे उन्हे चैन से जीने नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि 19 दिसंबर को इसी जगह पर काकोरी कांड के तीन महानायको पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान और ठाकुर रोशन सिंह के बलिदान दिवस को भी समारोह पूर्वक मनाया जाएगा।
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