देहरादून , अप्रैल 28 -- उत्तराखंड विधानसभा का एक दिवसीय "नारी सम्मान: लोकतंत्र में अधिकार" विषय पर आयोजित विशेष सत्र मंगलवार को पक्ष, विपक्ष की तीखी बहस के मध्य देर शाम लगभग 06 बजकर 09 मिनट पर सदन की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई।

इस बीच विपक्षी कांग्रेस और उसके सहयोगी अन्य दलों द्वारा महिला आरक्षण संबंधी संविधान संशोधन विधेयक का संसद और राज्यों की विधानसभाओं में विरोध करने का निन्दा प्रस्ताव बहुमत से पारित कर दिया गया।

इससे पहले नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और उनके सहयोगी सदस्य काजी निजामुद्दीन ने सदन की कार्यवाही से सत्ता पक्ष द्वारा कांग्रेस पर लगाए जा रहे आरक्षण विरोधी आरोपों को निकालने का निवेदन किया। सत्ता पक्ष से इस मुद्दे पर तीखी बहस के बीच विपक्षी कांग्रेस सदस्य बेल में आ गए।

कांग्रेस नेता यशपाल आर्य ने कहा कि पंचायतों में महिलाओं को आरक्षण देने का काम कांग्रेस ने किया है। आज पंचायत से लेकर निगम की मेयर तक हमारी बहनें हैं। 2023 में जो कानून पास हुआ था, उसे सरकार ने ही लटका दिया। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। हमारी मांग है कि वर्तमान लोकसभा की सीटों पर ही ये लागू किया जाए।

नेता प्रतिपक्ष ने मांग की कि उत्तराखंड के अगले विधानसभा चुनाव में ही महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार आठ साल का इंतजार करा रही है। 2034 तक ये कानून लागू हो पाएगा। भाजपा 2023 के कानून को लागू क्यों नहीं करना चाहती। उन्होंने कहा कि यह राजनीतिक जमीन को बचाने का मामला है। कोई महिलाओं को अधिकार देने का नहीं है।

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