अशोक रैना सेधर्मशाला , मार्च 05 -- कांग्रेस ने हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा की एकमात्र सीट के लिये कांगड़ा जिला कांग्रेस समिति अध्यक्ष अनुराग शर्मा को पार्टी का उम्मीदवार घोषित कर कई राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है।

यह सीट भाजपा सदस्य इंदु गोस्वामी के छह साल का कार्यकाल आठ अप्रैल को पूरा होने के बाद खाली हो रही है।

यह निर्णय हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा सीटों के लिये राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख नेताओं को उतारने की पार्टी की सामान्य परंपरा में बदलाव दर्शाता है। इसके बजाय कांग्रेस ने राज्य के भीतर से ही एक जमीनी नेता को चुना है। इस कदम को 2024 के राज्यसभा चुनाव में झेलनी पड़ी शर्मिंदगी के बाद राजनीतिक रूप से सतर्क और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पिछले चुनाव में 68 सदस्यीय हिमाचल प्रदेश विधानसभा में स्पष्ट बहुमत होने के बावजूद पार्टी विधायकों की क्रॉस-वोटिंग के कारण कांग्रेस उम्मीदवार को हार झेलनी पड़ी थी। उस घटनाक्रम ने आंतरिक मतभेदों को सामने ला दिया था और सत्ताधारी दल को बड़ा राजनीतिक झटका दिया था। इस पृष्ठभूमि में आगामी चुनाव और उम्मीदवार का चयन कांग्रेस नेतृत्व के लिए लिटमस टेस्ट के रूप में देखा जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एक युवा संगठनात्मक नेता का नामांकन पार्टी के अपने आधार को मजबूत करने और नेताओं की नयी पीढ़ी तैयार करने के प्रयास का संकेत देता है, जो युवा नेतृत्व पर केंद्रित है। इस कदम को पार्टी के भीतर बड़े पैमाने पर युवा नेताओं को दी जा रही तरजीह से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

कांगड़ा जिले से ताल्लुक रखने वाले जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष अनुराग शर्मा का चयन राजनीतिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण है। कांगड़ा हिमाचल प्रदेश का सबसे बड़ा और सबसे अधिक आबादी वाला जिला है और राज्य की चुनावी राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाता है। कांग्रेस नेतृत्व इस क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए उत्सुक दिखाई दे रहा है, खासकर 2024 के राज्यसभा घटनाक्रम के दौरान हुए राजनीतिक दलबदल के बाद जब भाजपा ने यहां अपनी पैठ बना ली थी।

पिछले साल निर्दलीय विधायक होशियार सिंह के इस्तीफे के बाद देहरा विधानसभा उपचुनाव में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की पत्नी कमलेश ठाकुर की जीत से इस जिले का राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है। गौरतलब है कि होशियार सिंह बाद में भाजपा में शामिल हो गये थे।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि राज्यसभा नामांकन की दौड़ में कई दावेदार शामिल थे, लेकिन नेतृत्व ने अंततः मुख्यमंत्री के समर्थन से श्री शर्मा के नाम पर मुहर लगायी। इसे कांगड़ा में पार्टी की संगठनात्मक उपस्थिति को मजबूत करने की रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।

घोषणा से पहले मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू काफी सहज नजर आये। गुरुवार को होली के जश्न के बाद उन्हें ऐतिहासिक 'शिमला कॉफी हाउस' में कांग्रेस विधायकों से बातचीत करते देखा गया। उन्होंने इस मुलाकात की तस्वीरें भी साझा कीं।

कांग्रेस शुक्रवार को विधानसभा परिसर में अपना नामांकन दाखिल कर सकती है। इस बीच भाजपा कांग्रेस के फैसले पर पैनी नजर रखे हुए थी। पार्टी नेताओं ने संकेत दिया था कि यदि कांग्रेस हिमाचल प्रदेश के बाहर के किसी व्यक्ति को मैदान में उतारती है तो भाजपा इस सीट पर चुनाव लड़ सकती है। हालांकि स्थानीय नेता का कांग्रेस की ओर से चयन किये जाने के बाद अब इसकी संभावना कम दिख रही है। इससे इस चुनाव के निर्विरोध होने के आसार बन गये हैं।

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