श्रीगंगानगर , दिसम्बर 06 -- राजस्थान में कांग्रेस ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर श्रीगंगानगर जिले में गंगनहर से जुडी परियोजनाओं को लेकर गलत बयानी का आरोप लगाया है।

कांग्रेस नेताओं ने श्रीगंगानगर में गंगनहर शिलान्यास शताब्दी समारोह में मुख्यमंत्री द्वारा दिये गये बयानों को झूठा बताते हुए कहा कि फिरोजपुर फीडर नहर के नवनिर्माण के लिए पूर्व कांग्रेस सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाए थे, लेकिन केंद्र सरकार ने राजनीतिक कारणों से इसमें देरी की।

कांग्रेस के नवनियुक्त जिलाध्यक्ष और श्रीकरणपुर विधायक रूपेंद्र सिंह रूबी, सूरतगढ़ विधायक डूंगरराम गेदर, जिला प्रमुख दूलाराम इदलिया, पंचायत समिति श्रीगंगानगर के प्रधान सुरेंद्रपालसिंह बराड़, पूर्व विधायक संतोष कुमार सहारन, महेंद्र सिंह बराड़, राजकुमार गौड़ और वरिष्ठ नेता हनुमान पूनिया ने शनिवार को श्रीगंगानगर में एक संयुक्त प्रेस वार्ता में ये बातें कहीं। उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया कि उन्होंने कांग्रेस सरकार के समय तैयार की गई फिरोजपुर फीडर नहर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को आगे बढ़ाया और केंद्र से मंजूरी दिलवायी। उन्होंने हालांकि सवाल उठाया कि जब नहर का निर्माण शुरू होगा, तब गंगनहर को पंजाब में वैकल्पिक जल स्रोत से पानी कैसे उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि श्रीगंगानगर के किसान प्रभावित न हों। कांग्रेस नेताओं ने विस्तार से बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 2019 में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से दो बार मुलाकात करके फिरोजपुर फीडर नहर की डीपीआर पर काम शुरू करवाया था। उस समय इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 400 करोड़ रुपये आंकी गयी थी, जिसमें राजस्थान के हिस्से के 200 करोड़ रुपये के बजट को गहलोत सरकार ने मंजूरी दे दी थी। डीपीआर को केंद्र सरकार को भेजा गया, लेकिन केंद्र ने राजनीतिक स्वार्थवश इसे मंजूरी नहीं दी और इसमें देरी की। इस वजह से लागत बढ़कर अब 600 करोड़ रुपये से अधिक हो गयी है। नेताओं ने कहा कि यदि केंद्र ने समय पर मंजूरी दी होती, तो नहर का निर्माण अब तक पूरा हो चुका होता और इसका लाभ पंजाब के साथ-साथ श्रीगंगानगर के किसानों को भी मिलता।

प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने खुलासा किया कि मुख्यमंत्री ने कल शुक्रवार को श्रीगंगानगर में फिरोजपुर फीडर नहर का शिलान्यास कर दिया, जबकि यह नहर पंजाब में बननी है और अब तक इसके लिए कार्यादेश भी जारी नहीं हुए हैं। उन्होंने सवाल किया कि जनवरी में निर्माण के लिए पानी की बंदी ली जाती है, तो श्रीगंगानगर के किसानों की खड़ी फसलें कैसे बचेंगी। इस समय फसलें पकाव की स्थिति में होंगी और पानी की आवश्यकता होगी। पानी नहीं मिला, तो किसान बर्बाद हो जाएंगे। उन्होंने मांग की कि सरकार पहले किसानों से बातचीत करके पानी बंदी का समय तय करे। साथ ही स्पष्ट करे कि निर्माण के दौरान गंगनहर को पंजाब में वैकल्पिक स्रोत से कितना और कहां से पानी दिया जाएगा, क्योंकि वर्तमान में इसे फिरोजपुर फीडर नहर से ही पानी मिलता है।

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