बेंगलुरू, मार्च 31 -- कांग्रेस ने मंगलवार को केंद्र सरकार पर कई क्षेत्रों में एक साथ कीमतों में बढ़ोतरी करके नागरिकों पर बोझ डालने का आरोप लगाया और कहा कि टोल, दवाइयों, ईंधन, निर्माण सामग्री और आवश्यक सेवाओं की लागत में व्यापक वृद्धि हुई है।

कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने मीडिया को संबोधित करते हुए दावा किया कि कर्नाटक से टोल संग्रह में पिछले कुछ वर्षों में लगातार वृद्धि देखी गई है। उन्होंने आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि 2020-21 में टोल संग्रह 1,866 करोड़ रुपये से बढ़कर 2021-22 में 2,350 करोड़ रुपये, 2022-23 में 2,351 करोड़ रुपये, 2023-24 में 3,517 करोड़ रुपये, 2024-25 में 4,086 करोड़ रुपये और 2025-26 में 4,320 करोड़ रुपये हो गया है और 2026-27 में लगभग 4,600 करोड़ रुपये का अनुमानित संग्रह और उस वित्तीय वर्ष के अंत तक 5,000 करोड़ रुपये का अनुमान है।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित 5 प्रतिशत टोल बढ़ोतरी से राजस्व में 250-300 करोड़ रुपये की और वृद्धि होगी जिससे यात्रियों पर बोझ बढ़ेगा। बेंगलुरु-मैसूर राजमार्ग का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि परियोजना पूरी होने से पहले ही टोल वसूली शुरू हो गई थी और बताया कि 118 किलोमीटर के इस खंड से लगभग 900 करोड़ रुपये पहले ही वसूले जा चुके हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं के मुद्दे पर श्री सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि लगभग 900 आवश्यक दवाओं की कीमतों में वृद्धि होने वाली है, जिनमें जीवन रक्षक दवाएं और मधुमेह, उच्च रक्तचाप और संक्रामक रोगों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं। उन्होंने मूल्य संशोधन की जाने वाली दवाओं की सूची में मेरोपेनेम जैसी एंटीबायोटिक दवाओं को विभिन्न खुराकों में शामिल किया और 2022 से दवाओं की कीमतों में बार-बार होने वाली वार्षिक वृद्धि की आलोचना की, जिसमें 2022 में 10.76 प्रतिशत और 2023 में 12.12 प्रतिशत की वृद्धि शामिल है। उन्होंने आवश्यक दवाओं पर कर लगाने को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि जीवन रक्षक दवाओं पर जीएसटी अभी भी लागू है, जिससे मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

औद्योगिक इनपुट पर भी अपनी आलोचना को आगे बढ़ाते हुए श्री सुरजेवाला ने कहा कि पॉलीइथिलीन और पॉलीप्रोपाइलीन जैसे पेट्रोकेमिकल उत्पादों की कीमतों में काफी वृद्धि हुई है, जिससे पैकेजिंग, एफएमसी सामान और घरेलू सामान प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि पीवीसी की कीमतों में भी वृद्धि हुई है, जिससे निर्माण, सिंचाई प्रणाली और कृषि अवसंरचना प्रभावित हो रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बिटुमेन की कीमतों में 30 प्रतिशत से 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो लगभग 45 हजार रुपये प्रति टन से बढ़कर 65 हजार रुपये प्रति टन हो गई है, जिससे सड़क और भवन निर्माण गतिविधियों पर असर पड़ेगा।

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