रायपुर , दिसंबर 05 -- छत्तीसगढ़ के वन एवं सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने कांग्रेस के सभी 41 नवनियुक्त जिला अध्यक्षों को प्रशिक्षण देने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी के यहां आने की खबरों के मद्देनजर कटाक्ष करते हुए कहा है कि कांग्रेस में तो संगठनात्मक प्रशिक्षण की तो कोई अवधाराएं कभी नजर ही नहीं आयी है, तो प्रस्तावित प्रशिक्षण शिविर में 10 दिनों तक कार्यकर्ताओं को 'ट्रिपल टी' ('ट्रांसफर, टेण्डर और टिकट) की सीख ही दी जाएगी, 'ट्रिपल पी' (परमपूज्य पोलिटिकल परिवारवादी पार्टी) की चरण-वंदना का पाठ पढ़ाया जाएगा।

श्री कश्यप ने कहा कि दरअसल कांग्रेस का राजनीतिक चरित्र ही झूठ बोलकर जनता को गुमराह करना और येन-केन-प्रकारेण अराजकता फैलाने के अपने एजेंडे को आगे बढ़ाना ही है। ऐसे में कांग्रेस के राहुल गांधी से लेकर तमाम केंद्रीय व प्रदेश नेता अपने जिला अध्यक्षों को क्या 10 दिनों तक यही प्रशिक्षण देने आ रहे हैं। कांग्रेस में प्रशिक्षण के नाम पर क्या पाठ पढ़ाया जाता रहा है, यह देश भलीभाँति जानता। युवा कांग्रेस के लोग तो एक बार ट्रेनिंग लेने के बाद ऐसा कहर बरपा चुके हैं कि युवा कांग्रेस के कांग्रेस की गुण्डावाहिनी कहा जाने लगा था। इसी प्रकार एनएसयूआई के लोगों ने ट्रेनिंग लेकर लौटते समय लूटपाट और तोड़फोड़ करके कहर बरपाया था।

उन्होंने कहा कि जिस कांग्रेस का संगठनात्मक ढाँचा ही पूरी तरह चरमरा चुका है, उस कांग्रेस में ले-देकर चले संगठन सृजन अभियान केवल सियासी नौटंकी साबित हुआ है।

उन्होंने कहा कि संगठन सृजन के दावे हवा-हवाई ही निकले क्योंकि दिग्गजों के करीबियों को ही अंततः कमान सौंप दी गई। उसमें भी लेन-देन, गुटबाजी और परस्पर आरोप-प्रत्यारोप के चलते उसमें भी वह फिसड्डी ही साबित हुई। युवा नेतृत्व को आगे लाने की बातें जुमलेबाजी ही साबित हुई हैं। हैरत की बात तो यह है कि जिस बस्तर सम्भाग के दन्तेवाड़ा जिला अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर कांग्रेस में घमासान मचने का आगाज हो गया है और जहाँ वोट चोरी के कांग्रेसी जुमले को कांग्रेस के लोग कांग्रेस नेतृत्व पर ही थोप रहे हैं, उसी बस्तर में प्रस्तावित कांग्रेस के ट्रेनिंग कैम्प में गुटबाजी में उलझी कांग्रेस के बड़े नेता अपने-अपने जिला अध्यक्षों को कौन-सी ट्रेनिंग देंगे, यह सहज ही समझा जा सकता है।

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