भोपाल , दिसंबर 05 -- मध्यप्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन आज मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सिंगरौली जिले में वन कटाई के मामले को लेकर सरकार पर आदिवासीविरोधी होने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया और बाद में कांग्रेस के विधायक पेसा अधिनियम से जुड़े सरकार के जवाब से असंतुष्ट होकर बहिर्गमन कर गए।

कांग्रेस विधायक डॉ विक्रांत भूरिया और जयवर्धन सिंह ने अपनी ध्यानाकर्षण सूचना के माध्यम से सिंगरौली जिले के धिरौली कोल माइन परियोजना और इसके कारण हो रही वन कटाई की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। श्री भूरिया ने आरोप लगाया कि ये क्षेत्र अडानी की सहायक कंपनी को दे दिया गया है और अब इसमें किसी को जाने नहीं दिया जा रहा है, वहां हजारों की संख्या में पुलिसकर्मी तैनात हैं, अंधाधुंध पेड़ों की कटाई हो रही है और क्षेत्र के ग्रामीण भी वहां से बाहर नहीं निकल पा रहे।

इस पर वन राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार ने कहा कि केंद्र के वन मंत्रालय की ओर से अनुमति प्राप्त हुई है और उस क्षेत्र से जितने पेड़ काटे गए हैं, वे दूसरे स्थानों पर लगाए गए हैं।

इस पर श्री भूरिया ने कहा कि सिंगरौली से पेड़ काट कर रायसेन और सागर में लगाए जा रहे हैं, जबकि सिंगरौली का एक्यूआई सबसे ज्यादा है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अडानी कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए आदिवासियों के साथ अन्याय हो रहा है।

कांग्रेस के ही दूसरे विधायक जयवर्धन सिंह ने कहा कि वर्ष 2023 में लोकसभा में केंद्र सरकार ने इस मुद्दे से जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में कहा था कि धिरौली क्षेत्र पांचवीं अनुसूची में आता है। उन्होंने कहा कि इस हिसाब से वहां पेसा कानून लागू होना चाहिए, जबकि अब ऐसा नहीं है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि उस क्षेत्र को पांचवीं अनुसूची से क्यों हटाया गया।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और पूर्व गृह मंत्री बाला बच्चन ने भी दोनों विधायकों का समर्थन किया और सरकार पर आदिवासीविरोधी होने का आरोप लगाया।

सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि कोल अधिनियम और आदिवासी अधिनियम केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से बनते हैं और उन्हें प्राप्त जानकारी के अनुसार सिंगरौली जिले में कभी पेसा अधिनियम नहीं रहा क्योंकि वहां आदिवासियों की संख्या कम है।

श्री विजयवर्गीय के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस के सभी विधायक हंगामा करने लगे। इसी बीच अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने सदन की कार्यवाही आगे बढ़ा दी। हालांकि अगले ध्यानाकर्षण के बाद उन्होंने एक बार फिर नेता प्रतिपक्ष श्री सिंघार को अपनी बात कहने की अनुमति दी, जिस पर कांग्रेस विधायकों ने इसी बात को दोहराया कि 2023 के बाद उस क्षेत्र को पांचवीं अनुसूची से कैसे हटा दिया गया। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस के विधायक नारेबाजी करते हुए सदन से बहिर्गमन कर गए।

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