धर्मशाला , फरवरी 19 -- हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के लंबागांव क्षेत्र के किसानों की एक सामूहिक पहल ग्रामीण आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण के एक सशक्त मॉडल के रूप में उभरी है।

जयसिंहपुर उपमंडल के सुआ गांव में मई 2023 में स्थापित 'लंबागांव मिल्क फेड फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन' ने 500 से अधिक किसानों को एकजुट कर सामूहिक खेती, डेयरी गतिविधियों और वैज्ञानिक सहायता के माध्यम से उनकी आजीविका को मजबूत किया है।

इस एफपीओ की सबसे खास विशेषता इसका महिला नेतृत्व है। इसके दस निदेशकों में से पांच महिलाएं हैं, और वे प्रमुख निर्णय लेने की जिम्मेदारियां संभाल रही हैं। इस पहल का नेतृत्व प्रोफेसर डॉ. अशोक कुमार सरियाल ने किया, जिन्होंने सेवानिवृत्ति के बाद अपने पैतृक गांव लौटकर किसानों को संगठित किया।

उन्होंने बताया कि आवारा जानवरों और बंदरों के आतंक के कारण किसान खेती छोड़ चुके थे, लेकिन कृषि विभाग की मदद से 7.5 हेक्टेयर क्षेत्र में सौर बाड़ लगाने के बाद किसानों का आत्मविश्वास वापस लौटा है।

एफपीओ ने किसानों को पारंपरिक गेहूं और मक्का के साथ-साथ जैविक हल्दी और अदरक जैसी लाभकारी फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित किया। राज्य सरकार के 90 रुपये प्रति किलो के समर्थन मूल्य पर कच्ची जैविक हल्दी खरीदने के फैसले से किसानों को आमदनी में इजाफा हुआ है।

वर्तमान में यह संस्था प्रतिदिन 150-200 लीटर दूध एकत्र करती है और 100 से अधिक घरों में दूध, पनीर और दही की आपूर्ति कर रही है। इससे भी क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा हो रहा है।

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