कांकेर/रायपुर, दिसंबर 17 -- छत्तीसगढ़ में बुधवार को पुलिस की मौजूदगी में सर्व आदिवासी समाज एवं अन्य लोगों ने कब्र की ईंट - गारे को उखाड़ फेंकने की कोशिश की, कब्र के साथ की जा रही छेड़छाड़ को रोकने के दौरान आमाबेड़ा के थाना प्रभारी और अन्य पुलिस कर्मियों के घायल होने की खबर है।

इस दौरान धक्का मुक्की के चलते कई ग्रामीणों के घायल होने की भी खबर है। अंतागढ़ के उप-विभागीय पुलिस अधिकारी (एसडीओपी) शुभम तिवारी ने वार्ता को बताया कि कांकेर जिले में सर्व आदिवासी समाज, धर्मांतरित ईसाइयों को गांव के श्मशान घाट/कब्रगाह में कफ़न - दफन की इजाजत नहीं देता है। इसके कारण जिला प्रशासन का स्पष्ट निर्देश धर्मांतरित लोगों के लिए है कि ऐसी मौतों की सूचना के बाद अंतिम संस्कार कार्यक्रम किए जाएं,लेकिन, ग्राम तेवड़ा के सरपंच ने अपने पिता की मृत्यु की सूचना जिला प्रशासन के अधिकारियों को दिए बिना गांव में ही शव को दफन किया है, दफन किए जाने के दूसरे दिन आज बुधवार को बड़ी संख्या में सर्व आदिवासी समाज और अन्य लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया है। पुलिस और जिला प्रशासन ने मिलकर दोनों धर्म के लोगों की बैठक आयोजित की है।

जिले में सर्व आदिवासी समाज ने कथित धर्मांतरण के खिलाफ लड़ाई छेड़ी हुई है, जिले के बहुत से गांवों में ईसाई धर्म के प्रचार प्रसार का नियमों के मुताबिक सार्वजनिक सूचना पट्ट लगाकर विरोध किया गया है, समाज के इस कदम को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने भी जायज करार दिया है। अपनी 18 सूत्रीय मांगों को लेकर सर्व आदिवासी समाज, अनुसूचित जाति पिछड़ा वर्ग और सवर्णों ने एक होकर 14 दिसम्बर को रैली करने के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम ज्ञापन सौंपा है।

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