तिरुवनंतपुरम , मई 03 -- प्रसिद्ध मलयालम कवि कुमारन आसन की पैतृक संपत्ति पर मछली बाजार खुलने के बाद विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं, जिसमें स्थानीय लोगों एवं सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं ने ऐतिहासिक स्थल पर अतिक्रमण का आरोप लगाया है।
यह विवाद थोम्मनविलकम थारावड को लेकर है जिसे कवि का जन्मस्थान माना जाता है। स्थानीय निवासियों ने मछली बाजार के निर्माण को तत्काल रोकने की मांग करते हुए एक विरोध परिषद का गठन किया है। उनका दावा है कि यह निर्माण माम्पल्ली मस्जिद ट्रस्ट के नाम पर संपत्ति पर अतिक्रमण करके किया जा रहा है।
इस मुद्दे ने व्यापक ध्यानाकर्षित किया है, जिसमें लेखक, सांस्कृतिक हस्तियां और कवि कुमारन के प्रशंसक भी विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए हैं। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि यह स्थल अपार सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व रखता है और इसे संरक्षित किया जाना चाहिए।
पिछली पंचायत प्रशासन पर भी निर्माण कार्य को नजरअंदाज करने के आरोप लगे हैं। तटीय पुलिस समेत अधिकारियों के पास शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि चुनाव आचार संहिता लागू होने दौरान भी काम तेजी से आगे बढ़ा है।
पूर्व पंचायत अध्यक्ष वी. लाइजू के खिलाफ उन पर परियोजना में शामिल मस्जिद समिति को समर्थन देने का आरोप लगाया गया है।
सूत्रों के अनुसार, कवि की पैतृक संपत्ति मूल रूप से दो एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैली हुई थी और समय के साथ वंशजों के बीच विभाजित हो गई थी, जिसका एक हिस्सा बाद में बिना स्पष्ट स्वामित्व के रह गया था। आरोप है कि इसी हिस्से पर बाजार निर्माण के लिए अतिक्रमण किया गया है।
इस बीच, स्थानीय निवासी और कुछ पंचायत सदस्य सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत भूमि के विस्तृत स्वामित्व रिकॉर्ड प्राप्त करने की तैयारी कर रहे हैं। बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बावजूद, शनिवार तक निर्माण कार्य जारी रहने की रिपोर्टें हैं, जिससे लोगों का गुस्सा और भड़क गया है।
उल्लेखनीय है कि कई संगठनों ने पहले सरकार से 1924 की नाव दुर्घटना के रहस्य को सुलझाने के लिए कदम उठाने का आग्रह किया था, जिसमें प्रख्यात कवि कुमारन की जान चली गई थी।
इन संगठनों के अनुसार, कवि कुमारन को उनकी कथात्मक कविता 'दुरावस्था' के प्रकाशन के बाद धार्मिक कट्टरपंथियों से धमकियां मिली थीं, जिसमें उन्होंने मालाबार विद्रोह के दौरान हिंदुओं के विरुद्ध हुए अत्याचारों की कड़ी आलोचना की थी। उनका दावा था कि कवि ने कुछ मुस्लिम समूहों द्वारा कविता को वापस लेने की मांग को अस्वीकार कर दिया था।
उन्होंने तर्क दिया कि नाव दुर्घटना में उनकी मृत्यु को महज एक दुर्घटना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए ।संगठनों ने बताया कि त्रावणकोर के राजा ने शुरुआत में कवि को पुलिस सुरक्षा प्रदान की थी लेकिन बाद में सुरक्षा वापस ले ली गई। उन्होंने घटना की परिस्थितियों पर भी संदेह व्यक्त किया और आरोप लगाया कि जिस नाव में कवि यात्रा कर रहे थे, उसका केबिन बाहर से बंद था और आसपास अन्य नावें भी मौजूद थीं। उन्होंने तर्क दिया कि ये परिस्थितियां सुनियोजित हत्या की संभावना की ओर इशारा करती हैं।
गौरतलब है कि 16 जनवरी, 1924 की रात को कोल्लम से अलाप्पुझा के लिए नाव से यात्रा कर रहे 145 यात्रियों में कुमारन आसन भी शामिल थे। पल्लाना में नाव दुर्घटनाग्रस्त होने के परिणामस्वरूप उनकी मौत हो गई।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित