बेंगलुरु , फरवरी 03 -- कर्नाटक विधानसभा ने मंगलवार को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया द्वारा प्रस्तुत एक प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित किया जिसमें केंद्र सरकार से विकसित भारत-रोज़गार और आजीविका के लिये गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी-ग्राम-जी)' को तत्काल निरस्त करने और 'महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा)' को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने की मांग की गई हैप्रस्ताव में मनरेगा के निरस्तीकरण को गंभीर चिंता का विषय बताया गया है। मनरेगा एक प्रमुख योजना है जो सुनिश्चित रोजगार एवं ग्रामीण आजीविका सुरक्षा प्रदान करती है। प्रस्ताव में कहा गया है कि केंद्र द्वारा एकतरफा रूप से लागू किया गया नया वीबी जी राम जी अधिनियम संघीय संरचना को कमजोर करता है और ग्रामीण समुदायों को उनके आजीविका अधिकारों से वंचित करता है।
सदन ने गौर किया कि मनरेगा के अंतर्गत केंद्र सरकार 100 मानव दिवसों के रोजगार के लिए मजदूरी की पूरी लागत वहन करती थी, जिससे ग्रामीण गरीब परिवारों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित होती थी। हालांकि नये अधिनियम के तहत राज्य सरकारों को 40 प्रतिशत लागत वहन करनी पड़ेगी जिससे राज्य के वित्त पर भारी बोझ पड़ेगा।
विधानसभा ने पाया कि यह संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करता है और 73वें संशोधन के अंतर्गत ग्राम पंचायतों को प्रदत्त शक्तियों एवं स्वायत्तता को कमजोर करता है।
प्रस्ताव में इस बात का भी उल्लेख किया गया कि मनरेगा ने सड़कों, कुओं, स्कूल परिसरों, शौचालयों, सिंचाई सुविधाओं और पंचायत भवनों जैसी आवश्यक स्थानीय संपत्तियों के निर्माण को सुगम बनाया है, जबकि नया अधिनियम पीएम गतिशक्ति योजना से जुड़े संसाधनों को राजमार्गों एवं प्रमुख सड़क परियोजनाओं की ओर मोड़ता है, जिससे ठेकेदारों और कॉरपोरेट्स को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ होगा।
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