बेंगलुरु , मई 03 -- कर्नाटक में परिवहन निगमों की संयुक्त कार्य समिति (जेएसी) ने रविवार को 20 मई से अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा कर दी है जिससे राज्य में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में एक बड़े व्यवधान का खतरा मंडराने लगा है।

जेएसी की घोषणा से वेतन और सेवा से जुड़ी लंबित मांगों को लेकर कांग्रेस सरकार पर दबाव और बढ़ गया है। अगर यह हड़ताल होती है, तो कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम (केएसआरटीसी ) और अन्य राज्य परिवहन उपक्रमों द्वारा चलाई जाने वाली बस सेवाएं पूरी तरह ठप हो सकती हैं। इससे पूरे राज्य में लाखों यात्रियों पर असर पड़ेगा, जिनमें दिहाड़ी मजदूर, छात्र, दफ्तर जाने वाले लोग और ग्रामीण यात्री शामिल हैं।

जेएसी का नेतृत्व अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एआईटीयूसी) से जुड़े कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम (केएसआरटीसी) के कर्मचारी और श्रमिक संघ कर रहा है, जिसे पांच अन्य यूनियनों का भी समर्थन प्राप्त है। इस समिति ने सरकार पर आरोप लगाया है कि कई दौर की बातचीत के बावजूद सरकार ने वेतन संशोधन और बकाया भुगतान को लेकर बार-बार दिए गए आश्वासनों को पूरा नहीं किया है।

यूनियनों ने इससे पहले पिछले साल पांच अगस्त को भी अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की थी, जब मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के साथ हुई बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला था। बाद में कर्नाटक उच्च न्यायालय के दखल के बाद इस आंदोलन को स्थगित कर दिया गया था। अब जब बातचीत एक बार फिर बेनतीजा रही है, तो जेएसी ने अपने आंदोलन को फिर से शुरू कर दिया है और 29 अप्रैल को मुख्यमंत्री को हड़ताल का औपचारिक नोटिस सौंप दिया है।

कर्मचारी एक जनवरी, 2024 से पिछली तारीख से 25 प्रतिशत वेतन वृद्धि, 38 महीनों के बकाया वेतन का भुगतान, फॉर्म 4 रूट के समय का वैज्ञानिक संशोधन, दैनिक भत्ते में बढ़ोतरी और अन्य सेवा लाभों को लागू करने की मांग कर रहे हैं। यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी है कि बढ़ते आर्थिक दबाव और कथित प्रशासनिक उदासीनता के कारण परिवहन कर्मचारी अब सब्र की सीमा पर पहुँच गए हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस मुद्दे को सुलझाने में सरकार की लगातार देरी ने कर्मचारियों के बीच भारी गुस्सा पैदा कर दिया है। यह संभावित हड़ताल कर्नाटक सरकार के लिए एक गंभीर चुनौती है, खासकर ऐसे समय में जब राज्य द्वारा संचालित बसें राज्य के बड़े हिस्सों में सार्वजनिक परिवहन और ग्रामीण संपर्क की रीढ़ बनी हुई हैं।

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