बेंगलुरु , मार्च 23 -- कर्नाटक में सरकारी जमीनों पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण का मामला सामने आया है, जहां करीब दो लाख एकड़ भूमि पर अवैध कब्जे दर्ज किए गए हैं।
यह मामला राज्य में एक बड़े भूमि घोटाले के रूप में उभरता दिख रहा है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कुल 1,11,098 सरकारी भूमि खंडों पर अतिक्रमण हुआ है, जो लगभग 1,95,021.17 एकड़ क्षेत्र में फैला है। इन कब्जों में झीलों के तल, चारागाह भूमि और अन्य सार्वजनिक उपयोग की जमीनें शामिल हैं, जिससे पर्यावरण और आजीविका पर गंभीर खतरे की आशंका जताई जा रही है।
अतिक्रमण की समस्या हासन और बेंगलुरु में सबसे ज्यादा गंभीर है। हासन में 19,955 मामले सामने आए हैं, जबकि बेंगलुरु शहर में 15,455 अतिक्रमण दर्ज किए गए हैं। क्षेत्रफल के लिहाज से बेंगलुरु में सबसे ज्यादा 34,220 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा है, इसके बाद हासन (31,565 एकड़), बल्लारी (27,904 एकड़) और हावेरी (23,047 एकड़) का स्थान है।
रिपोर्ट के अनुसार, कई अतिक्रमण प्रभावशाली लोगों से जुड़े होने के कारण इन्हें हटाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। इसके साथ ही ऐसे मामलों में सरकारी अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं, लेकिन अब तक किसी के खिलाफ ठोस कार्रवाई की खबर नहीं है।
राज्य के राजस्व विभाग ने बताया कि चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई की जा रही है और अब तक करीब 1,20,203 एकड़ जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा चुका है। इसके लिए 'एलएएनडी बीईएटी' ऐप जैसे डिजिटल उपकरणों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे राजस्व अधिकारी और ग्राम लेखाकार मौके पर सत्यापन कर सकें। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि झीलों और चारागाह भूमि पर बने अवैध ढांचे ध्वस्त किए जाएंगे और अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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