बेंगलुरु , अप्रैल 10 -- कर्नाटक के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री के.एच. मुनियप्पा ने राज्य में गहराते ऑटो एलपीजी संकट के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि बार-बार अनुरोध के बावजूद कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं मिली है, जिससे हजारों ऑटो चालकों की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है।
मंत्री ने बताया कि बेंगलुरु सहित पूरे कर्नाटक में एलपीजी से चलने वाले ऑटो चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अकेले बेंगलुरु में करीब 1.6 लाख ऑटो प्रभावित हैं, जबकि पूरे राज्य में यह संख्या लगभग तीन लाख तक है।
श्री मुनियप्पा के अनुसार, कुछ हद तक कमर्शियल सिलेंडरों की स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन ऑटो गैस की समस्या अब भी गंभीर बनी हुई है। उन्होंने कहा, "हमने कई बार केंद्र को लिखा है, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। ड्राइवर घंटों लंबी कतारों में खड़े रहने को मजबूर हैं,"उन्होंने कहा कि राज्य को प्रतिदिन करीब 280 मीट्रिक टन ऑटो एलपीजी की आवश्यकता होती है, लेकिन निजी आपूर्तिकर्ता-जो लगभग 65 प्रतिशत वितरण संभालते हैं-आपूर्ति घटा रहे हैं या कई जगह बंद कर चुके हैं। इससे सरकारी तेल कंपनियों पर पूरा दबाव आ गया है।
राज्य सरकार ने इस मुद्दे को मुख्य सचिव और केंद्र के पेट्रोलियम अधिकारियों के सामने उठाया है। इसके साथ ही निजी कंपनियों के साथ बैठक कर आपूर्ति बहाल करने के विकल्प तलाशे जा रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया कि पश्चिम एशिया के बाजारों में आपूर्ति व्यवधान के कारण यह संकट और बढ़ा है। इसके चलते कई पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें और स्थानीय स्तर पर कमी की स्थिति देखने को मिल रही है।
बढ़ती शिकायतों जैसे अधिक कीमत वसूलने और कालाबाजारी को देखते हुए सरकार ने सख्त निगरानी के निर्देश दिए हैं और पुलिस को अनियमित गतिविधियों पर कार्रवाई करने को कहा गया है।
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