बेंगलुरु , अप्रैल 04 -- कर्नाटक राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने राज्य में माध्यमिक विद्यालय छोड़ने का प्रमाणपत्र (एसएसएलसी) में अंक की बजाय केवल ग्रेडिंग देने के सरकार के फैसले पर विवाद बढ़ने के बाद हस्तक्षेप करते हुए इस फैसले की व्यापक समीक्षा करने और भाषा संरक्षण संघों द्वारा उठाई गई चिंताओं पर गौर करने का निर्देश दिया है।
गौरतलब है कि एसएसएलसी परीक्षाओं में तीसरी भाषा के लिए अंकों की जगह ग्रेडिंग सिस्टम लाने के कर्नाटक सरकार के फैसले पर अब कड़ी नजर रखी जा रही है। भाषा से जुड़े संगठनों की आपत्तियों के बाद राज्यपाल के कार्यालय को इसमें दखल देना पड़ा।
'स्थानीय भाषाओं के संरक्षण के लिए संघ' द्वारा राज्य प्रशासन को सौंपी गई एक अर्जी में यह चिंता जताई गई है कि सिर्फ ग्रेडिंग पर आधारित यह नया तरीका इस विषय के अकादेमिक महत्व को कम कर सकता है।
श्री गहलोत के निर्देश ने इस नीति के व्यापक प्रभावों पर सबका ध्यान खींचा है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे स्कूल शिक्षा विभाग और अन्य संबंधित पक्षों से सलाह-मशविरा करके इस फैसले का फिर से मूल्यांकन करें। यह समीक्षा ऐसे समय में हो रही है जब शिक्षकों, अभिभावकों और भाषा के पैरोकारों की चिंताएं बढ़ रही हैं। उनका तर्क है कि मूल्यांकन के तरीके छात्रों की गंभीरता और उनके सीखने के नतीजों को तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
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