बेंगलुरु , फरवरी 03 -- कर्नाटक के वरिष्ठ मंत्रियों ने मंगलवार को भारत-अमेरिका समझौते पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसके मूल स्वरूप और इसको लेकर मनाये जा रहे जश्न पर सवाल उठाये हैं।
इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारत से आयात की जाने वाली वस्तुओं पर लगने वाले शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है, लेकिन मंत्रियों ने चेतावनी दी है कि समझौते के मुख्य विवरण अभी भी स्पष्ट नहीं हैं। विशेष रूप से ऊर्जा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भारत द्वारा दी गयी संभावित रियायतों को लेकर संशय जताया गया है।
कर्नाटक के जल संसाधन मंत्री एम बी पाटिल ने इस घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिकी आयात शुल्क में कटौती को बड़ी उपलब्धि के रूप में दिखाया जा रहा है, लेकिन समझौते की वास्तविक रूपरेखा अभी भी अस्पष्ट है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस बारे में सार्वजनिक रूप से कोई स्पष्टता नहीं है कि भारत ने इसके बदले में क्या प्रतिबद्धताएं जतायी हैं, खासकर रूसी तेल की खरीद कम करने जैसे संवेदनशील मुद्दों पर।
श्री पाटिल ने कहा, " हम सभी जानते हैं कि अमेरिकी आयात शुल्क घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है, लेकिन इसके पीछे क्या है, यह कोई नहीं जानता।" उन्होंने समझौते की बारीकियों पर पारदर्शिता काे सामने लाना आवश्यक करार दिया।
कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने आयात शुल्क में कटौती पर केंद्र के जश्न को खारिज करते हुए इसे बड़ी सफलता बताने के तर्क पर सवाल उठाये। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार व्यापार संबंधों में व्यापक असंतुलन को नजरअंदाज करते हुए मामूली लाभ का जश्न मना रही है।
श्री खरगे ने कहा, " भारत सरकार एक पागलखाना बन गयी है। यह कुछ और नहीं बल्कि एक और 'जीएसटी बचाओ उत्सव' की तरह है।"उन्होंने तर्क दिया कि जब कई अमेरिकी सामानों पर भारत में पहले से ही लगभग शून्य शुल्क लगता है, तो 18 प्रतिशत आयात शुल्क कटौती का जश्न मनाने का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा कि यह सौदा भारतीय उपभोक्ताओं या घरेलू बाजारों के लिए कोई स्पष्ट लाभ प्रदान नहीं करता है।
कर्नाटक के मंत्रियों की यह प्रतिक्रिया प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बातचीत के बाद घोषित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद आयी है। केंद्र ने इस समझौते को द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ बताया है और दावा किया है कि इससे कपड़ा, इंजीनियरिंग सामान, फार्मास्यूटिकल्स और रत्न एवं आभूषण जैसे क्षेत्रों में निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।
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