बेंगलुरु , मई 04 -- कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस ने विधानसभा उपचुनाव में शानदार राजनीतिक जीत दर्ज दावणगेरे दक्षिण सीट पर भी कब्जा जमा लिया, जिससे भारतीय जनता पार्टी को दो प्रतिष्ठित सीटों पर महत्वपूर्ण झटका लगा है।

बागलकोट से कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक एच.वाई. मेती और दावणगेरे दक्षिण से शमनूर शिवशंकरप्पा के निधन के कारण हुए उपचुनावों को मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार और विपक्षी भाजपा दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा के रूप में देखा जा रहा था।

बागलकोट में, कांग्रेस के उम्मीदवार एवं राजनीति में नए उमेश मेती ने भाजपा के दिग्गज नेता और तीन बार के विधायक वीरभद्रय्या चरंतिमठ को करारी शिकस्त दी और अपने पिता की सीट को 21,866 वोटों के भारी अंतर से बरकरार रखा।

मतगणना के सभी 23 दौरों की गिनती के बाद घोषित आधिकारिक परिणामों के अनुसार, उमेश मेती को 97,941 वोट मिले जबकि चरंतिमठ को 76,075 वोट प्राप्त हुए। इस जीत के अंतर को हाल के दशकों में इस निर्वाचन क्षेत्र में दर्ज की गई सबसे बड़ी जीत माना जा रहा है।

कांग्रेस ने इस सीट पर पहले ही दौर से अपना दबदबा कायम रखा और 3,207 वोटों की बढ़त बना ली। यह अंतर बढ़ता गया और छठे दौर तक 15,000 वोटों को पार कर गया। हालांकि भाजपा ने आठवें और बारहवें दौर के बीच कुछ समय के लिए अंतर को कम किया लेकिन कांग्रेस ने बाद के चरणों में निर्णायक रूप से अपनी पकड़ मजबूत कर ली।

मुकाबला 16वें दौर के बाद से पूरी तरह से एक तरफा हो गया। 18वें दौर तक कांग्रेस की बढ़त 13,000 वोटों से अधिक हो गई, 21वें दौर में यह बढ़कर 17,205 वोटों तक पहुंच गई और अंत में यह बढ़त 21,866 वोटों पर आकर समाप्त हुई।

यह जीत इसलिए भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने दिवंगत एच वाई मेती के साथ अपने दीर्घकालिक राजनीतिक संबंधों के कारण बागलकोट चुनाव अभियान की व्यक्तिगत रूप से निगरानी की थी। भाजपा को चरंतिमठ से काफी उम्मीदें थीं जिन्होंने 2018 में एच वाई मेती को हराकर यह सीट जीती थी लेकिन आक्रामक प्रचार के बावजूद वे कांग्रेस को हराने में नाकाम रहे।

दावणगेरे दक्षिण में, कांग्रेस उम्मीदवार समर्थ शमनूर मल्लिकार्जुन ने शुरुआती दौर में पिछड़ने के बाद उल्लेखनीय वापसी करते हुए भाजपा उम्मीदवार श्रीनिवास दासकारियप्पा को 5,708 वोटों से हराया।

शुरुआत में मुकाबला भाजपा के पक्ष में लग रहा था क्योंकि शुरुआती दौर में दासकारियप्पा आगे चल रहे थे। हालांकि, मतगणना आगे बढ़ने के साथ ही कांग्रेस ने लगातार बढ़त हासिल की और अंत में समर्थ ने निर्णायक बढ़त बनाकर जीत दर्ज की।

इन दोहरी जीत से कर्नाटक में कांग्रेस का मनोबल बहुत बढ़ने और राज्य में सत्ता संभालने के लगभग तीन साल बाद भी पार्टी के निरंतर जनसमर्थन को मजबूत होने की उम्मीद है।

बागलकोट स्थित बागवानी विज्ञान विश्वविद्यालय और दावणगेरे स्थित डीआरआर स्कूल में भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आज सुबह आठ बजे मतगणना शुरू हुई। अधिकारियों ने कड़ा सुरक्षा-व्यवस्था लागू किया जिनमें प्रतिबंधित प्रवेश, उम्मीदवारों एवं प्रतिनिधियों के लिए अलग-अलग पार्किंग व्यवस्था और मतगणना कक्षों के अंदर मोबाइल फोन पर पूर्ण प्रतिबंध शामिल थे।

मतगणना के प्रारंभ में एक छोटी सी गड़बड़ी भी सामने आई जिसमें चाबी न मिलने पर अधिकारियों को ईवीएम के सुरक्षित कक्ष का ताला तोड़ना पड़ा। इस समस्या का शीघ्र ही समाधान हो गया और मतगणना प्रक्रिया प्रभावित नहीं हुई। बागलकोट में चुनाव अधिकारियों ने सेवारत मतदाताओं से प्राप्त डाक मतपत्रों के लिए एक समर्पित क्यूआर कोड-आधारित सत्यापन प्रणाली भी शुरू की और प्रक्रिया की निगरानी के लिए विशेष कर्मचारियों को तैनात किया।

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