, Feb. 19 -- झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन आज सदन में प्रश्नोत्तर काल की कार्यवाही सुचारु रूप से चली।

इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष की कई सदस्यों ने अल्पसूचित और तारांकित प्रश्न के माध्यम से अपने क्षेत्र और राज्य की समस्याओं को सदन में उठाया। सरकार की ओर से इन विषयों पर समुचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया गया। पक्ष-विपक्ष के सदस्यों ने शून्यकाल और ध्यानाकर्षण सूचना के माध्यम से भी क्षेत्र की समस्याओं को सदन में रखा। दूसरी पाली में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा हुई। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों की ओर से कई सुझाव और अपनी बातें रखी गई।

भाजपा के राज सिंहा ने अल्पसूचित प्रश्न के माध्यम से झारखंड में 28 बाजार समितियां और मार्केटिंग बोर्ड में 700 से अधिक पदों के रिक्त होने का मामला उठाया । उनकी अनुपस्थिति में जेडीयू विधायक सरयू राय ने पूरक प्रश्न पूछे। जिसके जवाब में कृषि मंत्री शिल्पी ने बताया गया कि झारखंड राज्य कृषि उपज और पशुधन विपणन (संवर्धण और सुविधा) नियमावली 2025 का गठन प्रक्रियाधीन है। नियमावली गठन के बाद सक्षम प्राधिकार की ओर से नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी जा सकेगी।

कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव ने अपने विधानसभा क्षेत्र में जाहेरस्थान, आदिवासी संस्कृति एवं कला केंद्र और धुमकुड़िया भवन की घेराबंदी का मामला उठाया। जिस पर कल्याण विभाग के मंत्री चमरा लिंडा की ओर से आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिलाया गया।

जेएलकेएम विधायक जयराम कुमार महतो एक अल्पसूचित प्रश्न के जवाब में जल संसाधन मंत्री हफीजुल हसन ने बताया कि सिंचाई परियोजनाएं विस्थापन, भूमि अधिग्रहण और वन भूमि के कारण पूरी करने में देरी होती है। इस कारण अब सरकार की ओर से भूमिगत पाइप लाइन के माध्यम से सिंचाई योजनाओं को पूरा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि झारखंड में अब तक 105 वृहत और मध्यम सिंचाई योजनाओं का कार्य पूरा क्या जा चुका है, जिससे करीब 2.5 लाख हेक्टेयर सिंचाई सुविधा का सृजन किया गया। इसके अलावा 27 बड़ी और मध्यम योजनाओं का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है। वर्ष 2029-20 तक इसके पूर्ण हो जाने की संभावना है , जिससे करीब 440 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई सुविधा का सृजन होगा। फिलहाल इन अधूरी सिंचाई योजनाओं से अभी 150 हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

विधायक जयराम कुमार महतो ने कहा कि जब उद्योगों के लिए पानी उपलब्ध कराने की बात होती है, तो अनापत्ति प्रमाण पत्र, एनओसी तुरंत मिल जाता है लेकिन किसानों को पानी देने में बाधा होती है। उन्होंने कहा कि राज्य में किसानों को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए कई डैम बनाए गए लेकिन विभाग की ओर से इन डैमों से किसानों को सिंचाई की सुविधा नहीं उपलब्ध नहीं कराई जा रही। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में लघु, मध्यम और वृहद सिंचाई की कई योजनाएं आज भी अधूरी है। लागत बढ़ने के बावजूद इन योजनाओं को अब तक पूरा नहीं किया जा सका है।

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