भुवनेश्वर , फरवरी 26 -- ओडिशा सरकार ने कटक के पुराने इलाके के लिए विशेष योजना और भवन मानक नियम तय किए हैं। 'सिल्वर सिटी' के नाम से प्रसिद्ध इस ऐतिहासिक क्षेत्र के लिए उठाए गए इस कदम का उद्देश्य पुराने शहर को अधिक रहने योग्य, लचीला और आर्थिक रूप से जीवंत बनाना है, साथ ही इसकी अनूठी ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखना है।

कटक विकास प्राधिकरण (सीडीए) ने बुधवार को इस संबंध में एक गजट अधिसूचना जारी की, जिसके साथ ही पुराने शहर के वार्डों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया यह नियामक ढांचा प्रभावी हो गया। यह पहल इन पुराने मोहल्लों के विशिष्ट शहरी स्वरूप और लंबे समय से चली आ रही विकास संबंधी चुनौतियों को ध्यान में रखकर की गई है।

गौरतलब है कि कटक के पुराने क्षेत्र अपनी संकरी सड़कों, भूखंडों तक सीमित पहुंच, भीड़भाड़ और पार्किंग सुविधाओं की कमी के लिए जाने जाते हैं। इनके कारण यहां सीडीए के नियमों को यहां लागू करना कठिन रहा है। नई अधिसूचना के साथ, प्राधिकरण ने एक व्यवहारिक दृष्टिकोण अपनाया है जो पुराने शहर की जमीनी हकीकत के अनुकूल है। इन नियमों का मकसद आधुनिकीकरण और विरासत में संतुलन बनाना है।

हाल ही में अधिसूचित ओडिशा विकास प्राधिकरण के तीसरे संशोधन के अनुरूप, इस नए ढांचे में कई रियायतें दी गई हैं। छोटे आवासीय भूखंडों के लिए सड़क की न्यूनतम चौड़ाई घटाकर 4.5 मीटर कर दी गई है। इसके अलावा, गैर-उच्च इमारतों के लिए अनिवार्य दूरी के नियमों को तर्कसंगत बनाया गया है और फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) को क्षेत्र के मौजूदा घनत्व के अनुसार फिर से निर्धारित किया गया है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित