नयी दिल्ली , फरवरी 11 -- ओमान अपने प्लास्टिक क्लस्टर की सफलता को दोहराने की कोशिश के तहत भारतीय निवेशकों को नयी योजना वाले एल्युमीनियम प्रोसेसिंग ज़ोन में हिस्सा लेने के लिये आमंत्रित कर रहा है। इससे यह पहल तेज़ी से बढ़ रही भारत-ओमान आर्थिक साझेदारी के तहत आयेगी।

लादायन कार्यक्रम के प्रमुख मुंधर अल-रवाहि ने यूनीवार्ता से बातचीत में कहा कि ओमान एल्युमिनियम क्षेत्र के इर्द-गिर्द "एक संपूर्ण इकोसिस्टम" विकसित करना चाहता है। उनका कहना है कि यह नया औद्योगिक क्लस्टर कच्चे माल के निर्यात के बजाय मूल्य वर्धित प्रसंस्करण और विनिर्माण पर केंद्रित होगा।

तीन वर्ष पहले ओमान ने प्लास्टिक विकास ज़ोन की शुरुआत की थी, जिसमें अब तक 28 परियोजनाओं पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। इनमें से करीब 10 परियोजनाओं में उत्पादन शुरू कर चुका है या शुरू होने के करीब हैं, जबकि शेष विभिन्न चरणों में हैं।

श्री अल-रवाहि ने कहा, "इसी मॉडल को अब एल्युमिनियम क्षेत्र में लागू करने की योजना है," जिसमें देश के स्मेल्टर्स को निचली श्रेणी के उद्योगों के लिए मुख्य आपूर्तिकर्ता बनाया जाएगा। भारत-ओमान के बीच 2020 से अब तक निवेश प्रवाह तीन गुना बढ़कर पांच अरब डॉलर तक पहुंच गया है। धातु विनिर्माण ,हरित इस्पात और अमोनिया जैसे क्षेत्र सहयोग के प्रमुख स्तंभ बनकर उभरे हैं। रक्षा सहयोग के अलावा, दोनों देश अंतरिक्ष, रेयर अर्थ मिनरल्स और साइबर सुरक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में भी सहयोग पर चर्चा कर रहे हैं।

लादायन कार्यक्रम के तहत प्रस्तावित एल्युमिनियम ज़ोन इसी व्यापक औद्योगिक सहयोग का हिस्सा है। ओमान का मानना है कि भारतीय कंपनियां उसकी स्थापित एल्युमिनियम अवसंरचना और हरित उत्पादन की संभावनाओं का लाभ उठा सकती हैं।

श्री अल-रवाहि के अनुसार, ओमान की राजनीतिक स्थिरता, प्रतिस्पर्धी दरों पर औद्योगिक भूमि, कम बिजली लागत (जो एल्युमिनियम प्रोसेसिंग के लिए अहम है) और यूरोप-एशिया के बीच रणनीतिक भौगोलिक स्थिति निवेशकों के लिए बड़े आकर्षण हैं। अरब सागर-खाड़ी क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स हब के रूप में ओमान भारतीय निर्माताओं को खाड़ी, यूरोप और अफ्रीका के बाजारों तक पहुंच प्रदान करता है।

वर्ष 2024-25 में भारत-ओमान द्विपक्षीय व्यापार 10.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जिसमें एल्युमिनियम वैल्यू चेन की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। हाल ही में हस्ताक्षरित भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) के तहत ओमान ने लगभग सभी उत्पादों पर शून्य-शुल्क पहुंच प्रदान की है, जिससे पहले लागू 0-5 प्रतिशत के एमएफएन शुल्क समाप्त हो गए हैं। यह समझौता संयुक्त उपक्रमों और औद्योगिक सहयोग को और मजबूती देगा।

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