नयी दिल्ली , मार्च 02 -- भारतीय नौसेना के नौकायन पोत (आईएनएसवी) 'कौंडिन्य' को रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने औपचारिक रूप से उसकी पहली यात्रा के बाद आधिकारिक तौर पर मुंबई बंदरगाह में शामिल किया है।

अरब सागर के पार इस ऐतिहासिक यात्रा ने न केवल पुराने समुद्री रास्तों को फिर से दिखाया बल्कि भारत की सदियों पुरानी समुद्री परंपराओं का भी जश्न मनाया, जिससे भारत-ओमान के पुराने रिश्तों और देश की समृद्ध समुद्री विरासत को फिर से पक्का किया गया।

उल्लेखनीय है कि 'कौंडिन्य' पारंपरिक रूप से बना-सिला हुआ एक जहाज है, जिसे पूरी तरह से पुरानी भारतीय तकनीकों का इस्तेमाल करके बनाया गया है, जिसमें लकड़ी के तख्तों को नारियल की रस्सी का इस्तेमाल करके हाथ से सिला जाता है और प्राकृतिक रेजिन से सील किया जाता है।

यह जहाज भारत की सदियों पुरानी समुद्री कला को फिर से जिंदा करने का एक उदाहरण है और देश के अपनी भारतीय ज्ञान परंपरा को फिर से खोजने और बचाने के वादे को दिखाता है। अजंता की गुफाओं में पांचवीं सदी के एक चित्र से लिया गया और पारंपरिक कारीगरों के साथ मिलकर भारतीय नौसेना की देखरेख में बनाया गया यह जहाज पारंपरिक कारीगरी और आधुनिक नौसैनिक इंजीनियरिंग की पहचान का मेल है।

आईएनएसवी कौंडिन्य 29 दिसंबर 2025 को पोरबंदर से मस्कट के लिए रवाना हुआ और उन पुराने समुद्री रास्तों पर गया था जिनका इस्तेमाल कभी भारतीय नाविक करते थे। वह 14 जनवरी 2026 को पोर्ट सुल्तान कबूस पहुंचा, जहां ओमानी गणमान्य लोगों और भारतीय समुदाय के लोगों की मौजूदगी में उसका औपचारिक स्वागत किया गया।

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