भुवनेश्वर , दिसंबर 12 -- ओडिशा सरकार ने राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (एनएमए) के पूर्व अध्यक्ष प्रो. किशोर कुमार बासा और विश्व इंजीनियरिंग संगठनों महासंघ (डब्ल्यूएफईओ) की रणनीतिक योजना समिति के अध्यक्ष इंजी. अशोक बासा के महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विचार करने की सहमति दी है।
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक ये प्रस्ताव राज्य में सांस्कृतिक संरक्षण, आदिवासी विकास और दीर्घकालिक जल सुरक्षा पर केंद्रित हैं।
मुख्य सचिव मनोज अहूजा की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में राज्य प्रशासन ने संबंधित विभागों को इन सिफारिशों का अध्ययन करने और विशेष रूप से विरासत संरक्षण, पर्यटन संवर्धन, आदिवासी कल्याण तथा जल संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में उचित अनुवर्ती कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया।
प्रो. किशोर बस ने भारत की माननीय राष्ट्रपति को लिखे अपने पत्र में उल्लिखित सिफारिशें प्रस्तुत कीं, जिनका मुख्य केंद्र मयूरभंज जिले का सामाजिक-सांस्कृतिक एवं शैक्षिक उत्थान है। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि रायरंगपुर में केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय जनजातीय विकास संस्थान (एनआईटीडी) की स्थापना की जाए, क्योंकि यह क्षेत्र ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल के जनजाति-प्रधान इलाकों के निकट है। उन्होंने बारिपदा में राष्ट्रीय झूमर केंद्र की स्थापना करने की भी सिफारिश की ताकि पूर्वी भारत की इस महत्वपूर्ण अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर झूमर को संरक्षित और प्रोत्साहित किया जा सके। इसके अतिरिक्त, उन्होंने खिचिंग में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधीन एक पुरातात्विक संग्रहालय स्थापित करने का आग्रह किया ताकि वहां की विरासत संपदाओं का संरक्षण और राष्ट्रीय स्तर पर प्रचार-प्रसार हो सके।
प्रो. बासा ने कहा कि ये पहल जनजातीय सशक्तिकरण, विरासत संरक्षण और क्षेत्रीय विकास को मजबूत करेंगी। इंजी. अशोक बासा ने ओडिशा में जल शासन को पुनर्गठित करने की तत्काल आवश्यकता पर विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने जोर दिया कि भारत 2050 तक अभूतपूर्व जल संकट की ओर बढ़ रहा है, जिसका जीडीपी पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। ओडिशा भूजल क्षय, कृषि में जल के अकुशल उपयोग और जलवायु परिवर्तनशीलता के कारण अत्यधिक संवेदनशील है। इन जोखिमों से निपटने के लिए उन्होंने ओडिशा राज्य जल प्रबंधन प्राधिकरण (ओएसडब्ल्यूएमए) के गठन का प्रस्ताव रखा, जो सभी विभागों में जल मांग और आपूर्ति का नोडल प्रबंधन करेगा।
उन्होंने जिला-वार जल मांग-आपूर्ति बैलेंस शीट तैयार करने और समयबद्ध, समन्वित कार्रवाई पर बल दिया। उनका दीर्घकालिक विजन है कि 2036 तक ओडिशा को "जल अधिशेष राज्य" बनाया जाए।
मुख्य सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रो. किशोर बासा और इंजी. अशोक बासा द्वारा किए गए गहन शोध और ओडिशा के विकास के प्रति उनकी निष्ठा की सराहना की। उन्होंने ओडिशा के विकास के प्रति उनके समर्पण के लिए आभार व्यक्त किया और आश्वासन दिया कि उनके प्रस्तावों पर राज्य की प्राथमिकताओं के अनुरूप गंभीरता से विचार किया जाएगा। साथ ही, विभागों को विकसित ओडिशा और विकसित भारत के विजन को आगे बढ़ाने में उनकी विशेषज्ञता का उपयोग करने का निर्देश दिया गया।
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