भुवनेश्वर , मार्च 11 -- उड़ीसा उच्च न्यायालय ने राज्य में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की चिंताओं पर कड़ा संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को ओडिशा मानवाधिकार आयोग में मौजूदा रिक्तियों को शीघ्र भरने का निर्देश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश हरीश टंडन और न्यायमूर्ति एम. एस. रमन की पीठ ने मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़े मामलों के बढ़ते बोझ और लंबित मामलों के निपटारे के लिए सरकार को तत्काल कदम उठाने का आदेश दिया है।
पीठ ने कहा है कि राज्य सरकार को आयोग को एक पूर्ण निकाय बनाने के प्रति गंभीरता दिखानी चाहिए।
गौरतलब है कि वर्तमान में आयोग केवल एक सदस्य (चित्तरंजन महापात्र) के भरोसे चल रहा है, क्योंकि अध्यक्ष न्यायमूर्ति शत्रुघ्न पुजारी और सदस्य असीम अमिताभ दास का कार्यकाल गत नौ फरवरी को समाप्त हो चुका है।
मानवाधिकार कार्यकर्ता प्रबीर कुमार दास ने अपनी याचिका में दलील दी कि अध्यक्ष का पद रिक्त होने के कारण आयोग का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है। मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 25(1) के अनुसार, अध्यक्ष का पद रिक्त होने की स्थिति में राज्यपाल एक अधिसूचना के माध्यम से किसी मौजूदा सदस्य को तब तक अध्यक्ष के रूप में कार्य करने के लिए अधिकृत कर सकते हैं, जब तक कि नए अध्यक्ष की नियुक्ति न हो जाए।
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