भुवनेश्वर , मार्च 14 -- ओडिशा पुलिस ने डिजिटल क्षेत्र में बच्चों के सामने आने वाली बढ़ती चुनौतियों और संभावनाओं से निपटने के लिए नीति निर्माताओं, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, शिक्षकों, अभिभावकों, छात्रों, बाल अधिकार अधिकारियों और विशेषज्ञों को एक साथ लाने के लिए यूनिसेफ से सहयोग किया है।
राज्य पुलिस ने आज 'जुवेंटिका - बच्चों के डिजिटल अधिकार और सुरक्षा सम्मेलन' की मेजबानी की। इस दौरान इस बात पर जोर दिया कि बच्चे जिस तरह तेजी से डिजिटल प्लेटफॉर्म के संपर्क में आ रहे हैं, उसके मद्देनजर उनकी ऑनलाइन सुरक्षा बेहद जरूरी है।
अधिकारियों के अनुसार, सम्मेलन ने विभिन्न हितधारकों को यह तलाशने के लिए मंच प्रदान किया कि कैसे संस्थान, परिवार और समुदाय ऑनलाइन वातावरण में बच्चों के अधिकारों और उनके कल्याण की रक्षा के लिए मिलकर काम कर सकते हैं।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए ओडिशा पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) योगेश बहादुर खुरानिया ने बच्चों के प्रति साइबर खतरों के संबंध में कानून प्रवर्तन की बदलती जिम्मेदारियों पर चर्चा की।
राज्य के पुलिस प्रमुख ने साइबर सुरक्षा पर जागरूकता बढ़ाने और पुलिस की क्षमता निर्माण के लिए ओडिशा पुलिस के कदमों की चर्चा की। उन्होंने बताया कि जिलों में 20 अन्य नये साइबर पुलिस स्टेशन बनाये जा रहे हैं और जांच में तकनीकी सहायता के लिए जमीनी स्तर पर साइबर विशेषज्ञों को नियुक्त किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि आने वाले दिनों में पूरी ओडिशा पुलिस को 'बाल-अनुकूल' बनाने के प्रयास में 71 पुलिस स्टेशनों को 'फ्रेंडली कॉर्नर' के साथ नया रूप दिया जा रहा है।
भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या 2011 के लगभग 12.5 करोड़ से बढ़कर 2021 तक 84.5 करोड़ से अधिक हो गयी थी। जैसे-जैसे तकनीक समाज में गहराई तक पहुंच रही है, बच्चों को साइबर खतरों से बचाना कानून प्रवर्तन और संस्थानों के लिए एक बेहद अहम जवाबदेही बन गयी है।
सीआईडी अपराध शाखा की पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनयतोष मिश्रा ने सीआईडी सीबी की साइबर विंग की 'बाल एवं महिला ऑनलाइन दुर्व्यवहार निगरानी इकाई' की ओर से की जा रही कार्रवाइयों की रूपरेखा पेश की। इसमें इंटरनेट से सीएसईएएम और अन्य हानिकारक सामग्री को हटाना शामिल है।
ओडिशा की महिला एवं बाल अपराध शाखा (सीएडब्लू एंड सीडब्लू) की अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) शाइनी एस ने प्रवर्तन के साथ-साथ रोकथाम और जागरूकता के महत्व पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, "आज के बच्चे भौतिक और डिजिटल दोनों दुनिया में बड़े हो रहे हैं। हमारी जिम्मेदारी न केवल साइबर अपराधों पर प्रतिक्रिया देना है, बल्कि बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों को इंटरनेट का सुरक्षित और जिम्मेदारी से उपयोग करने के लिए ज्ञान और उपकरणों से सशक्त बनाना भी है।"इस कार्यक्रम के मुख्य आकर्षणों में से एक हस्तियों और इन्फ्लुएंसर्स के साथ अनौपचारिक संवाद था। इसमें यह पता लगाया गया कि ऑनलाइन संस्कृति, सोशल मीडिया के रुझान और डिजिटल सामग्री किशोरों की आकांक्षाओं, व्यवहार और पहचान को कैसे प्रभावित करते हैं।
सम्मेलन में तीन विषयगत पैनल चर्चाएं भी शामिल थीं, जो बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा में पुलिस की भूमिका, युवा मन पर डिजिटल प्लेटफॉर्म और रचनाकारों के प्रभाव और डिजिटल वातावरण में बच्चों के अधिकारों की रक्षा में गोपनीयता, सहमति और डिजिटल सीमाओं के महत्व पर केंद्रित थीं।
इसके अतिरिक्त पुलिस और स्कूल एवं जन शिक्षा विभाग ने स्कूलों में, अभिभावक-शिक्षक बैठकों और स्कूल प्रबंधन समितियों में 'बाल कल्याण पुलिस अधिकारी' की भागीदारी और जुड़ाव के लिए एक तंत्र शुरू करने की संयुक्त प्रतिबद्धता जतायी।
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