पुरी , दिसंबर 06 -- ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने शनिवार को कहा कि प्रदेश ने बिजली आपूर्ति को अपने विकास का एक मुख्य स्तंभ माना है और राज्य ने 2036 तक प्रदेश को हरित ऊर्जा हब में बदले का लक्ष्य रखा है।
श्री माझी ने यहां आयोजित ग्लोबल एनर्जी लीडर्स समिट 2025 (जीईएलएस 2025) में बोलते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि राज्य आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्थायी भविष्य सुनिश्चित करने के लिए ऊर्जा क्षेत्र में रणनीतिक निवेश कर रहा है। उन्होंने कहा, "बिजली हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और एक ज़रूरी बुनियादी ढांचा है जो आत्मनिर्भरता की दिशा में हमारी यात्रा को आगे बढ़ाएगा।" मुख्यमंत्री ने जीईएलएस 2025 को एक अनोखा मंच बताया जो केंद्र और राज्य सरकारों, उद्योगों, शैक्षणिक संस्थानों, शोधकर्ताओं और वैश्विक ऊर्जा विशेषज्ञों को एक साथ लाकर स्वच्छ और अधिक आत्मनिर्भर ऊर्जा भविष्य के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करेगा। उन्होंने कहा कि यह शिखर सम्मेलन इस विज़न को हासिल करने की दिशा में पहला राष्ट्रव्यापी कदम है। ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने वीडियो लिंक के ज़रिए सभा को संबोधित किया और इस बात पर ज़ोर दिया कि सफल ऊर्जा परिवर्तन के लिए समय के साथ कई सरकारों के समन्वित प्रयासों की ज़रूरत होती है। उन्होंने कहा कि सहयोग की यही भावना ग्लोबल एनर्जी लीडर्स समिट की नींव है।
उप मुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि मशहूर कोणार्क सूर्य मंदिर ऊर्जा के साथ भारत के सदियों पुराने संबंध का प्रतीक है। उन्होंने आगे कहा कि ओडिशा का लक्ष्य 2030 तक नवीनीकरण ऊर्जा के ज़रिए अपने औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों में बड़े बदलाव लाना है।
इस कार्यक्रम में दिल्ली के बिजली मंत्री आशीष सूद, राजस्थान के बिजली मंत्री हीरा लाल नागर, ओडिशा के मुख्य सचिव मनोज आहूजा, ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव विशाल कुमार देव, टोनी ब्लेयर इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल चेंज के वरिष्ठ ऊर्जा सलाहकार पियरे नोएल और आईआईटी कानपुर के सेंटर फॉर एनर्जी रेगुलेशन एंड एनर्जी एनालिटिक्स लैब के प्रोफेसर अनूप सिंह ने भी हिस्सा लिया।
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