भुवनेश्वर , फरवरी 04 -- ओडिशा की उपमुख्यमंत्री प्रवती परिदा ने राज्य में 'कारवां पर्यटन' की शुरुआत करते हुए बुधवार को धौली में तीन पर्यटन कारवां को झंडी दिखाकर रवाना किया।

श्रीमती परिदा ने इस अवसर पर कहा कि कई यूरोपीय देशों में कारवां पर्यटन अच्छी तरह से स्थापित है और ओडिशा की इस पहल का उद्देश्य युवा यात्रियों, साहसिक गतिविधियों के प्रेमियों और अनूठे स्थानों की खोज करने वालों को आकर्षित करना है, जो प्रकृति के करीब रहकर गहरे यात्रा अनुभव प्राप्त करना पसंद करते हैं।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि कारवां पर्यटन आगंतुकों को गोपनीयता, आवाजाही की स्वतंत्रता और अपने अनुसार गंतव्यों की खोज करने का एक विशेष तरीका प्रदान करता है।

गौरतलब है कि कारवां चलते-फिरते छोटे-मोटे घर जैसे होते हैं, जो बसों की तरह होते हैं।

भुवनेश्वर-एकाम्र निर्वाचन क्षेत्र के विधायक बाबू सिंह ने कहा कि 'कारवां' पर्यटकों को बेहतर आराम और सुरक्षा के साथ नए गंतव्यों का पता लगाने में मदद करेंगे। उन्होंने पर्यटन के इस नये तरीके को बढ़ावा देने के लिए सरकार के प्रयासों की सराहना की।

पर्यटन विभाग के निदेशक दीपांकर महापात्रा ने कहा कि कारवां पर्यटन पारंपरिक पर्यटन स्थलों से परे पर्यटकों को आकर्षित करने में मदद करेगा, जिससे संतुलित क्षेत्रीय विकास को समर्थन मिलेगा और पारंपरिक पर्यटन केंद्रों पर दबाव कम होगा।

यह पहल पर्यटन विभाग द्वारा वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) मोड के तहत शुरू की गई है और इसका संचालन और प्रबंधन 'सैंड एंड पेबल टूर्स' द्वारा किया जा रहा है।

विभाग ने कारवां-आधारित अनुभवों के लिए उच्च पर्यटन क्षमता वाले कई गंतव्यों की पहचान की है, जिनमें हीराकुंड, सिमलीपाल, दारिंगबाड़ी, देवमाली, तलसारी, पेंटा, मंगलाजोड़ी, जिरंगा और राज्य के अन्य प्राचीन स्थान शामिल हैं।

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