नयी दिल्ली , मार्च 16 -- शोका यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर अली खान महमूदाबाद के 'ऑपरेशन सिंदूर' पर उनके सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर चल रही आपराधिक कार्यवाही में मुकदमा चलाने के लिए मंज़ूरी देने से इनकार करने के हरियाणा सरकार के निर्णय के बाद उच्चतम न्यायालय ने उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही समाप्त कर दी है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने सोमवार को इस मामले का निपटारा करते हुए कहा, "हमें इस बात पर शक करने का कोई कारण नहीं है कि याचिकाकर्ता, जो एक अत्यंत विद्वान प्रोफ़ेसर हैं, भविष्य में भी समझदारी और विवेकपूर्ण तरीके से ही काम करेंगे।"हरियाणा सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सालिसिटर जनरल एस वी राजू ने पीठ काे अवगत कराया कि राज्य सरकार ने तीन मार्च को उनके खिलाफ अभियोजन को मंजूरी नहीं देने का निर्णय लिया था ।

हरियाणा पुलिस ने पिछले साल मई में प्रोफ़ेसर महमूदबाद के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें गिरफ़्तार किया था। यह मामला प्रोफ़ेसर महमूदाबाद के एक फेसबुक पोस्ट से शुरू हुआ था, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान-समर्थित आतंकवाद की आलोचना करते हुए युद्ध से बचने की सलाह दी थी। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में भारत की प्रेस वार्ताओं को संबोधित करने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी का ज़िक्र करते हुए कहा था कि जिस ऊर्जा से उनकी तारीफ़ की जा रही है, उसी ऊर्जा से भारत में अल्पसंख्यकों पर होने वाले अत्याचार पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

ये टिप्पणियां करने के बाद उनके खिलाफ दो प्राथमिकियां दर्ज की गयी थीं। एक शिकायत में दुश्मनी को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय एकता के लिए हानिकारक कार्यों से संबंधित अपराध का आरोप लगाया गया था, जबकि हरियाणा महिला आयोग की अध्यक्ष द्वारा दायर एक अन्य शिकायत में सार्वजनिक उपद्रव और लज्जा भंग करने से संबंधित अतिरिक्त प्रावधानों का हवाला दिया गया था।

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