तिरुवनंतपुरम , फरवरी 28 -- केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी को धर्मनिरपेक्ष भारत के ताकतवर प्रतीकों में से एक बताया, जिनकी 2002 की गुजरात हिंसा में जान चली गयी थी।
श्री विजयन ने अहमदाबाद में गुलबर्ग सोसाइटी हत्याकांड का जिक्र करते हुए कहा कि जाफरी उन 69 लोगों में शामिल थे, जिन्हें 28 फरवरी, 2002 को सांप्रदायिक दंगे के दौरान आग में जलाकर मार दिया गया था।
मुख्यमंत्री ने इस घटना को आजाद भारत के इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक और अल्पसंख्यकों को लक्ष्य करके की गई हिंसा की एक गंभीर झलक बताया। श्री विजयन ने अपने बयान में कहा कि जब एक हिंसक भीड़ ने गुलबर्ग सोसाइटी पर धावा बोला, तो घबराए हुए लोग सुरक्षा की मांग करते हुए जाफरी के घर की ओर दौड़े। जब हालात काबू से बाहर होने लगे, तो जाफरी ने अधिकारियों से संपर्क किया और अंदर फंसे लोगों को बचाने के लिए तुरंत पुलिस दखल देने की अपील की। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि अधिकारियों की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि गुलबर्ग सोसाइटी में हुआ नरसंहार गुजरात दंगों के दौरान अल्पसंख्यकों पर हुए जुल्म की एक साफ और दर्दनाक याद दिलाता है। गौरतलब है कि इस हिंसा को लगभग 24 साल बीत चुके हैं। श्री विजयन ने जाफरी की पत्नी जकिया जाफरी की अगुवाई में उन लोगों के खिलाफ लंबे और पक्के कानूनी संघर्ष का उल्लेख किया, जिन पर उन्होंने हिंसा की साजिश रचने का आरोप लगाया था।
उन्होंने उनकी लम्बी लड़ाई को बेमिसाल और न्याय की लगातार कोशिश का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि देशभर में धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक ताकतें उनकी कोशिशों के साथ खड़ी हैं। जकिया जाफरी का पिछले साल 86 साल की उम्र में निधन हो गया। उनकी स्थिति के अनुसार उन्हें पूरा न्याय नहीं मिला।
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