नयी दिल्ली , अप्रैल 08 -- उद्योग मंडल एसोचैम और उद्योग क्षेत्र की परामर्श सेवा फर्म-असेला ने भारतीय रेल पर अपनी एक संयुक्त रिपोर्ट में देश में रेल माल ढुलाई के तंत्र को मज़बूत करने के लिए एक व्यापक रोडमैप की रूपरेखा दी है।

विकसित भारत के लिए भविष्योन्मुखी रेल प्रणाली पर एसोचैम द्वारा बुधवार को यहां आयोजित सम्मेलन में जारी रिपोर्ट, 'फ्यूचर रेडी रेलवे फॉर विकसित भारत' में कहा गया है कि अभी रेल से माल ढुलाई का हिस्सा लगभग 28-30 प्रतिशत है, जो वैश्विक मानकों से काफ़ी कम है, इसलिए इसमें विकास की काफ़ी गुंजाइश है। इसमें कहा गया है कि 2030 तक रेलवे से माल ढुलाई को वर्तमान 166 करोड़ टन से 3,00 करोड़ टन के स्तर तक पहुंचाने के लिए भारतीय रेलवे क्षेत्र तेज़ी से बदलाव के दौर से गुज़र रहा है। यह बदलाव मालगाडियों के लिए विशेष मार्ग और लगभग रेल-मार्गों के पूरी तरह से विद्युतीकरण जैसी पहलों से प्रेरित है, जिससे दक्षता और स्थिरता दोनों बढ़ रही हैं।

रिपोर्ट में भविष्य के लिए रेल ढुलाई क्षमता बढ़ाने, विशेष रेल मालगाड़ी गलियारे के विस्तार, निजी भागीदारी बढ़ाकर और लाजिस्टिक्स सम्पर्क की आखिरी कड़ियों में सुधार करके माल ढुलाई में रेल की हिस्सेदारी बढ़ाने की आवश्कता को रेखांकित किया गया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि रेलवे की ढुलाई बढ़ने से लॉजिस्टिक्स की लागत को कम करने में मदद मिलेगी ।

यह लागत इस समय सकल घरेल उत्पाद (जीडीपी) के7.97 प्रतिशत के स्तर पर है। इसे कम करने के लिए रेलवे का इस्तेमाल परिवहन के ज़्यादा किफ़ायती और टिकाऊ साधन के तौर पर करने की बात कही गयी है, जो भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मज़बूत करने के लिए बहुत ज़रूरी है।

इस सम्मेलन में रेवले बोर्ड के प्रधान अधिशासी निदेशक (इंफ्रा.)श्याम सुंदर गुप्ता, कार्यकारी निदेशक (ट्रैफ़िक कमर्शियल) डॉ. सुरेंद्र कुमार अहिरवार, एसोचैम की रेलवे काउंसिल के सलाहकार संजय बाजपेयी और कॉनकॉर के पूर्व कार्यकारी निदेशक सुशील नवल के नेतृत्व में गहन चर्चा की गयी।

श्री अहिरवार ने कहा कि भारतीय रेलवे तेज़ी से बदलाव के दौर से गुज़र रहा है, और अब यह सिर्फ़ धीरे-धीरे आगे बढ़ने के बजाय एक ज़्यादा गतिशील और भविष्य के लिए तैयार सिस्टम बन रहा है। पिछले एक दशक में, भारतीय रेलवे ने बुनियादी ढांचागत सुविधाओं का का काफ़ी विस्तार किया है, जिसमें लगभग 31,000 किलोमीटर नयी रेल लाइनें जोड़ी गयी हैं, जो विकास में आयी तेज़ी को दिखाता है। यह, नयी नीतिगत दिशा और नेतृत्व-आधारित दृष्टिकोण के साथ मिलकर, इस क्षेत्र को एक ज़्यादा कुशल, जवाबदेह और ग्राहक-केंद्रित ढांचे की ओर बढ़ने में मदद कर रहा है।

श्री बाजपेयी ने कहा कि भारतीय रेलवे एक पारंपरिक ट्रांसपोर्टर से बदलकर लॉजिस्टिक्स दक्षता का एक प्रमुख चालक बन रहा है। श्री नोवाल ने रेलवे में कुशल और निर्बाध परिवहन व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के महत्व पर ज़ोर दिया और भारतीय रेलवे के विद्युतीकरण की अत्यंत महत्ता को रेखांकित किया, जो अब लगभग 99 प्रतिशत तक पहुंच चुका है।

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