देहरादून , फरवरी 26 -- उत्तराखंड पुलिस के विशेष कार्य बल (एसटीएफ) की साइबर अपराध (क्राइम) टीम ने हरियाणा के अम्बाला से एक शातिर साइबर ठग को गिरफ्तार किया है। जिसे गुरुवार को बी वारंट पर देहरादून लाया गया।
एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अजय सिंह ने बताया कि एक प्रकरण देहरादून निवासी शिकायतकर्ता द्वारा अप्रैल 2025 में दर्ज कराया गया था। जिसके अनुसार , उससे व्हाट्सअप चैट के माध्यम से सम्पर्क कर षडयन्त्र के तहत धोखा देने की नियत से स्वंय को वित्तीय सलाहकार, विश्लेषक और कार्यकारी प्रतिष्ठित निवेश फर्म एएसके इनवेस्टमेंट मैनेजर्स लिमिटेड बताकर वट्सएप ग्रुप "274-1वी1 वीआईपी ग्रुप" और "के 668- एएसके वेल्थ विस्डम कंसोर्टियम" में जोड़कर लिंक के माध्यम से '"एस्किकोरो" नामक एप डाउनलोड कराया गया। जहां विश्वास में लेकर रजिस्टर करवा, स्टॉक मार्केट में ट्रेडिंग के नाम पर दिये गये खातों में विभिन्न लेन-देन के माध्यम से कुल 1,17,00,000 रुपये (एक करोड़ सत्रह लाख) की ऑनलाइन धोखाधड़ी की गई। उन्होंने बताया कि पीड़ित को इस बात का आभास भी नहीं हुआ कि वह एक सुनियोजित साइबर ठगी का शिकार बन रहा है।
श्री सिंह ने बताया कि प्रकरण की गम्भीरता के दृष्टिगत इसका पर्यवेक्षण अपर पुलिस अधीक्षक विवेक कुमार, सहायक पुलिस अधीक्षक कुश मिश्रा एवं विवेचना विकास भारद्वाज निरीक्षक, साइबर क्राइम पुलिस थाने के सुपुर्द की गईं। इसके बाद घटना में प्रयुक्त बैंक खातों, रजिस्टर्ड मोबाइल नम्बरों तथा व्हाट्सअप की जानकारी को सम्बन्धित बैंकों, सर्विस प्रदाता कम्पनियों, मेटा कम्पनी से पत्राचार कर डेटा प्राप्त किया गया। उन्होंने बताया कि विश्लेषण से साइबर अपराध अभियुक्त को चिह्नित करते हुये उसकी तलाश जारी की गई। तत्पश्चात साइबर टीम द्वारा विधिक प्रावधानों के अन्तर्गत, प्रकाश में आये अभियुक्त बलजीत सिंह पुत्र गुरमेल सिंह, निवासी 10/54 गोविंदगढ़ 255, माथेरी शेखां, अंबाला (हरियाणा) को साक्ष्यों के आधार पर गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने बताया कि जिसे बी वारंट पर देहरादून लाया गया है।
एसएसपी सिंह ने बताया कि प्रारम्भिक पूछताछ में अभियुक्त ने साइबर अपराध के लिए जिस बैंक खातों का प्रयोग किया, उसमें मात्र दो माह में ही लाखों रुपयों का लेन-देन होना प्रकाश में आया है। जाँच में यह भी प्रकाश में आया है कि अभियुक्त के बैंक खाते के विरुद्ध देश के कई राज्यों में प्राथमिकी दर्ज हैं। जिसके सम्बन्ध में जानकारी के लिए अन्य राज्यों की पुलिस के साथ संपर्क किया जा रहा है ।
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