लखनऊ , मार्च 13 -- संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में विश्व किडनी दिवस के अवसर पर नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी और किडनी प्रत्यारोपण विभागों ने राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (सोटो) के सहयोग से वॉकथॉन और जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य किडनी स्वास्थ्य, पर्यावरणीय स्थिरता और अंगदान के महत्व के प्रति लोगों को जागरूक करना था।
कार्यक्रम की शुरुआत किडनी स्वास्थ्य और मृत दाता प्रत्यारोपण के बारे में जनजागरूकता के लिए आयोजित वॉकथॉन से हुई। इसके बाद संकाय सदस्यों, स्वास्थ्यकर्मियों, छात्रों और आम नागरिकों की एक सभा आयोजित की गई।
नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर नारायण प्रसाद ने विश्व किडनी दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह हर वर्ष मार्च के दूसरे गुरुवार को मनाया जाता है। उन्होंने इस वर्ष की थीम "सभी के लिए किडनी स्वास्थ्य - लोगों की देखभाल, ग्रह की रक्षा" का उल्लेख करते हुए पर्यावरण प्रदूषण, प्लास्टिक और विषैले पदार्थों के किडनी स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों के प्रति सचेत रहने की आवश्यकता बताई।
यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर एम.एस. अंसारी ने किडनी रोग बढ़ने के कारणों पर चर्चा करते हुए गुर्दे की पथरी को एक प्रमुख कारण बताया। उन्होंने कहा कि गुर्दे की पथरी से किडनी फेल होने का खतरा बढ़ सकता है, जिसे सही खान-पान और समय पर उपचार से रोका जा सकता है। उन्होंने किडनी रोगों के समग्र प्रबंधन में यूरोलॉजी विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी प्रकाश डाला।
एसजीपीजीआई के निदेशक प्रो. आर.के. धीमन ने अंगदान को मानवता की महान सेवा बताते हुए कहा कि इससे कई लोगों का जीवन बचाया जा सकता है। उन्होंने संस्थान में हाल ही में सफलतापूर्वक किए गए मल्टी-ऑर्गन रिट्रीवल और प्रत्यारोपण को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
राज्य प्रत्यारोपण नेटवर्क की ओर से डॉ. हर्षवर्द्धन ने उत्तर प्रदेश में सोटो की कार्यप्रणाली और अंगदान को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एसजीपीजीआई में हाल ही में हुई सफल अंग प्रत्यारोपण गतिविधियां राज्य में मृत दाता प्रत्यारोपण कार्यक्रम की बढ़ती प्रगति को दर्शाती हैं।
एसजीपीजीआई के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. देवेन्द्र गुप्ता ने अंगदान के प्रति जागरूकता फैलाने में युवाओं और छात्र समुदाय की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। इस दौरान उन्होंने अपनी बेटी द्वारा लिखी गई एक भावनात्मक कविता भी सुनाई, जिसमें अंगदान के मानवीय और संवेदनशील पक्ष को दर्शाया गया।
कार्यक्रम के अंत में संस्थान के उन सदस्यों को सम्मानित किया गया जिन्होंने मृत दाता प्रत्यारोपण कार्यक्रम को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इनमें एनेस्थिसियोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, यूरोलॉजी और नेफ्रोलॉजी विभाग के वरिष्ठ संकाय सदस्य, रेजिडेंट डॉक्टर, कर्मचारी तथा सोटो टीम के सदस्य शामिल रहे।
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