पुणे , मार्च 13 -- कथित एसएससी बोर्ड परीक्षा पेपर लीक मामले की जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। आरोपी ने टेलीग्राम प्लेटफॉर्म पर तकनीकी फीचर का इस्तेमाल कर छात्रों को यह विश्वास दिलाया कि उसके पास परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र मौजूद हैं, जबकि वास्तव में ऐसा नहीं था।

पुलिस उपायुक्त (जोन-1) श्री कृषिकेश रावले ने शुक्रवार को बताया कि आरोपी चैतन्य विनोद शेंडे (18) ने पूछताछ के दौरान स्वीकार किया कि उसने टेलीग्राम के एक तकनीकी फीचर का इस्तेमाल कर पेपर लीक का झूठा भ्रम पैदा किया।

जांच में सामने आया कि आरोपी ने टेलीग्राम के 'फाइल रिप्लेसमेंट' फीचर का फायदा उठाया। इस फीचर के जरिए एक बार अपलोड की गई पीडीएफ फाइल को बाद में बदला जा सकता है। फाइल बदलने पर केवल उसका कंटेंट बदलता है, जबकि मूल टाइमस्टैम्प वही रहता है, पोस्ट पर केवल "संपादित" का टैग दिखाई देता है।

पुलिस के अनुसार आरोपी ने इसी तकनीक के आधार पर एक खास तरीका अपनाया। वह एसएससी परीक्षा से एक दिन पहले टेलीग्राम ग्रुप में पासवर्ड-प्रोटेक्टेड पीडीएफ फाइल अपलोड करता था और दावा करता था कि वह आगामी परीक्षा का प्रश्नपत्र 600 रुपये में उपलब्ध करा सकता है।

जो छात्र उससे संपर्क कर पैसे भेजते थे, उन्हें आरोपी तुरंत ब्लॉक कर देता था। बाद में परीक्षा समाप्त होने के बाद वह असली प्रश्नपत्र प्राप्त कर पहले अपलोड की गई पीडीएफ फाइल को उसी से बदल देता था।

क्योंकि पोस्ट का टाइमस्टैम्प नहीं बदलता था, इसलिए ऐसा लगता था कि प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने से पहले ही अपलोड किया गया था, जिससे छात्रों को विश्वास हो जाता था कि आरोपी के पास वास्तव में पेपर पहले से मौजूद था।

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