कोलकाता , जनवरी 29 -- चुनाव आयोग ने लिखित निर्देश जारी करते हुए कहा है कि बूथ-स्तरीय एजेंट (बीएलए) या किसी भी राजनीतिक दल के प्रतिनिधियों को राज्य में चल रही मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान सुनवाई केंद्रों पर मौजूद रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

यह निर्देश तब आया जब तृणमूल कांग्रेस विधायक असित मजूमदार हुगली के चिनसुराह-मोगरा ब्लॉक कार्यालय गए और सुनवाई प्रक्रिया को रोक दिया। उन्होंने आयोग से लिखित स्पष्टीकरण मांगा कि बीएलए को सुनवाई में शामिल होने की अनुमति क्यों नहीं दी जा रही है। यह प्रक्रिया लगभग दो घंटे तक रुकी रही।

आयोग ने घटना के तुरंत बाद सभी जिला मजिस्ट्रेटों को इस नियम को सख्ती से लागू करने और किसी भी राजनीतिक दबाव के आगे न झुकने के लिये कहा। आयोग ने सभी जिला मजिस्ट्रेटों को जारी एक निर्देश में कहा कि किसी भी राजनीतिक दल के एजेंट को सुनवाई केंद्रों के अंदर अनुमति नहीं दी जा सकती है और इस कारण से सुनवाई को रोका नहीं जा सकता है।

निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी राजनीतिक दल का एजेंट सुनवाई केंद्र के अंदर पाया जाता है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। आयोग ने चेतावनी दी कि किसी भी परिस्थिति में सुनवाई प्रक्रिया को रोका नहीं जाना चाहिए, जैसा कि हुगली में देखा गया। जिला मजिस्ट्रेटों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि सुनवाई सुचारू रूप से जारी रहे।

श्री मजूमदार ने कहा है कि वह श्री अभिषेक बनर्जी और श्री ममता बनर्जी के निर्देशों के अनुसार काम करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग आम लोगों को अनावश्यक रूप से सुनवाई के लिए बुलाकर परेशान कर रहा है, जिससे बुजुर्ग और बीमार मतदाताओं को कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। वह तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी द्वारा हाल ही में आयोजित एक वर्चुअल बैठक का जिक्र कर रहे थे। इस बैठक में श्री बनर्जी ने बूथ स्तरीय एजेंटों को सुनवाई केंद्रों पर मौजूद रहने के लिए कहा था।

इस बीच श्री मजूमदार द्वारा सुनवाई प्रक्रिया रोकने के बाद, मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने जिला मजिस्ट्रेटों को आवश्यकता पड़ने पर मौके पर मौजूद रहने, स्थिति की समीक्षा करने और यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि बीएलए सुनवाई केंद्रों में प्रवेश न करें। उनसे यह भी देखने के लिए कहा गया है कि सुनवाई प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।

उल्लेखनीय है कि श्री मजूमदार ने मानवीय कारणों का हवाला देते हुए बाद में अपना विरोध वापस ले लिया था, लेकिन चेतावनी दी थी कि भविष्य में सुनवाई फिर से रोकी जा सकती है।

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