सिलीगुड़ी , अप्रैल 16 -- पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को विश्वकवि रवींद्रनाथ टैगोर की एक मार्मिक पंक्ति "न्याय की आवाज खामोशी में रोती है" का हवाला देते हुए उन मतदाताओं की पीड़ा को व्यक्त किया, जिनके नाम विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में मतदाता सूचियों से बाहर रह गए।

इस साहित्यिक संदर्भ ने एक तीखे राजनीतिक हमले की पृष्ठभूमि तैयार की क्योंकि उन्होंने केंद्र सरकार, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और चुनाव आयोग पर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर और खत्म करने का आरोप लगाया।

विधानसभा चुनावों में अब केवल एक सप्ताह बाकी है, ऐसे में पश्चिम बंगाल में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है।

सुश्री बनर्जी ने कूचबिहार जिले के माथाभांगा में एक रैली को संबोधित करते हुए एसआईआर प्रक्रिया की कड़ी आलोचना की और घोषणा की, "एसआईआर का मतलब है तबाही। लोकतंत्र के लिए तबाही।" उन्होंने दावा किया कि राज्य में लगभग 60 लाख नाम हटा दिए गए थे, जिसे उन्होंने 'तार्किक विसंगतियां' करार दिया। उन्होंने कहा, "मैंने संघर्ष किया और 32 लाख नामों को फिर से शामिल करवाने में सफल रही लेकिन अभी भी कई नाम गायब हैं।"सुश्री बनर्जी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि जिन लोगों के नाम हटा दिए गए हैं, उन्हें स्थायी रूप से बाहर करने की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने जोर देकर कहा, "अगर हम सत्ता में वापस आते हैं, तो हम आपके नाम फिर से शामिल करवाएंगे और जो लोग आपको बाहर निकालने की धमकी दे रहे हैं, उन्हें जनता लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देगी।"मुख्यमंत्री ने कूचबिहार जिले के दिनहाटा में एक रैली में श्री शाह पर अपना हमला और तेज करते हुए कहा कि वे एसआईआर प्रक्रिया का इस्तेमाल बंगाली भाषी लोगों को 'घुसपैठिया' करार देने और उन्हें देश से बाहर निकालने के लिए कर रहे हैं।

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