जयपुर , जनवरी 29 -- जलवायु संरक्षण के क्षेत्र में देश के युवा चेंजमेकर्स की ऊर्जा, विचारों और प्रतिबद्धता को दुनिया के सामने लाने के लिए यूथ ईको समिट-2026 एक बड़ा मंच बनकर उभरा है।
राजस्थान की राजधानी जयपुर में इसका आयोजन बजाज फाउंडेशन इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, यूनिसेफ युवा और एशिया के सबसे बड़े युवाओं की भागीदारी वाले सतत् मंच टेक्नो के सहयोग से किया गया। यह आयोजन विद्यार्थियों की ओर से पेश साहसिक समाधानों से लेकर, पर्यावरण क्षेत्र की मशहूर हस्तियों द्वारा अपनी राय साझा करने तथा प्रेरणा और एक्शन के मामले में एक मास्टरक्लास की तरह था।
इस आयोजन में भारत के 66 शहरों के विद्यार्थी एक साथ नजर आए, जो एक साल तक चले राष्ट्व्यापी अभियान का नतीजा था। अभियान में स्कूलों और सामुदायिक संगठनों की पहल के जरिए तीन लाख से ज़्यादा युवा शामिल हुए थे। जयपुर में आयोजित कार्यक्रम में 63 स्कूल से 2500 से ज्यादा बच्चों ने भाग लिया।
सम्मेलन की शुरुआत रावत सीनियर सेकेंडरी स्कूल के विद्यार्थियों की प्रस्तुति "द लास्ट कॉल फ्रॉम प्लैनेट अर्थ" की पेशकश के साथ हुई, जो इस बात की याद दिलाता है कि हमारी पृथ्वी की चुनौतियाँ अत्यावश्यक और वास्तविक हैं। बजाज फाउंडेशन की मुख्य परोपकार अधिकारी शोहिनी दत्ता ने समस्या को समझाने के लिए मंच संभाला और सामने मौजूद मुद्दों को संदर्भ और स्पष्टता दी। छात्र प्रतिनिधियों ने मिनिकॉप30 के लिए कदम बढ़ाया, मुख्य संकटों की पहचान की और जेन अल्फा क्लाइमेट लीडर प्रसिद्धि सिंह ने बताया कि युवा लोग कैसे ज़िम्मेदारी ले सकते हैं।
बजाज फाउंडेशन के डायरेक्टर पंकज बजाज ने कहा, "भारत के युवा सिर्फ भविष्य के बारे में बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे उसे आकार दे रहे हैं। वे यह काम पूरी ऊर्जा, रचनात्मकता और हिम्मत के साथ कर रहे हैं। वे जिम्मेदारी ले रहे हैं और जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा, विचार और ऐसी ही कई बातों से बढ़ते संकट की ओर ध्यान दिला रहे हैं।"टेक्नो मोबाइल इंडिया के सीईओ, अरिजीत तलापात्रा ने कहा, 'हर पीढ़ी को भविष्य को आकार देने का एक मौका मिलता है और इस पीढ़ी के हाथों में एआई है। सबसे ज़्यादा खुशी यह देखकर होती है कि युवा लोग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल सिर्फ़ क्रिएट करने के लिए नहीं, बल्कि केयर करने के लिए भी कर रहे हैं। जब एआई का मकसद तय होता है तो यह हमें कचरा कम करने, हमारी धरती की रक्षा करने और हमारे जीने के तरीके पर फिर से सोचने में मदद कर सकता है।
टेक्नो को बजाज यूथ ईको समिट में इन युवा चेंजमेकर्स के साथ खड़े होने पर गर्व है, क्योंकि कल के ग्रीन लीडर्स इजाज़त का इंतज़ार नहीं कर रहे हैं, वे आज ही बदलाव ला रहे हैं।'ऑक्सफ़ोर्ड यूनियन के चीफ ऑफ स्टाफ वीरांश भानुशाली ने एक साझा दुनिया और व्यापक पर्यावरण सिस्टम में भारत की ज़िम्मेदारी पर बात की। सुबोध पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों ने "सुविधा की कीमत" को सबके सामने रखा और वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को उजागर किया।
इसके बाद एक समूह चर्चा हुई जिसमें नेहा राघव , सुरेंद्र गोथरवाल और इसरो की पूर्व वैज्ञानिक पंक्ति पांडे ने इस बात पर चर्चा की कि एआई जलवायु चुनौतियों से निपटने में कैसे मदद कर सकता है। मुख्य सत्रों के अलावा पूरे आयोजन स्थल पर समिट के दौरान काफी हलचल रही।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित