शिमला , मार्च 14 -- हिमाचल प्रदेश में एलपीजी सिलेंडरों की कमी का असर छोटे ढाबों और चाय की दुकानों पर असर दिखने लगा है और लोगों ने वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर इलेक्ट्रिक इंडक्शन स्टोव और अन्य कुकिंग उपकरणों की खरीद बढ़ा दी है।

राजधानी शिमला में पारंपरिक लकड़ी के सामान और सड़क किनारे खाने-पीने की दुकानों के लिए जाने जाने वाले व्यस्त लक्कड़ बाजार इलाके में एलपीजी खत्म होने के कारण कम से कम दो चाय की दुकानों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। छोटे फूड वेंडरों का कहना है कि घरेलू गैस सिलेंडर की रीफिल में देरी से उनका रोज़ का कारोबार प्रभावित हो रहा है।

घरेलू उपभोक्ता कुलदीप शर्मा ने बताया कि उन्होंने तीन दिन पहले एलपीजी सिलेंडर बुक कराया था, लेकिन अभी तक आपूर्ति नहीं की गयी है। गैस एजेंसी जाने पर उन्हें बताया गया कि बॉटलिंग प्लांट पर एलपीजी ट्रकों की लंबी कतार के कारण आपूर्ति में देरी हो रही है। उन्होंने कहा कि अब काम जारी रखने के लिए इंडक्शन चूल्हा या कोयला-लकड़ी का सहारा लेना पड़ सकता है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि आपूर्ति बाधित होने की आशंका से लोगों में घबराहट बढ़ी है और कई उपभोक्ता पहले से सिलेंडर बुक करा रहे हैं, जिससे सप्लाई चेन पर अस्थायी दबाव बना है। संजौली निवासी संजीव सुंटा के अनुसार भविष्य में कमी की आशंका के कारण लोगों ने अग्रिम बुकिंग शुरू कर दी है।

इस बीच इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बेचने वाले दुकानदारों के यहां मांग में तेज बढ़ोतरी देखी जा रही है। लोअर बाजार स्थित एक दुकान के सेल्समैन विजय शर्मा ने बताया कि शुक्रवार को उनकी दुकान पर एक ही दिन में लगभग 25 इंडक्शन स्टोव बिके, जो अब तक की सबसे ज्यादा दैनिक बिक्री है। उन्होंने कहा कि राज्य में बिजली की आपूर्ति स्थिर होने के कारण लोग तेजी से इलेक्ट्रिक उपकरणों की ओर रुख कर रहे हैं।

ग्रामीण इलाकों में भी कई परिवार एलपीजी बचाने के लिए पारंपरिक लकड़ी के चूल्हों या इलेक्ट्रिक उपकरणों का उपयोग करने लगे हैं। चेओग गांव की निवासी कांता राटा ने बताया कि वे आपात स्थिति के लिए हमेशा लकड़ी का भंडार रखती हैं।

प्रशासन ने हालांकि एलपीजी की जमाखोरी या कालाबाजारी की खबरों को खारिज किया है। शिमला के जिला खाद्य नियंत्रक ने कहा कि राज्य में एलपीजी सिलेंडरों का पर्याप्त बफर स्टॉक मौजूद है और लोगों से घबराकर बुकिंग न करने की अपील की गई है।

राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष डॉ. एस. पी. कट्याल ने भी कहा कि एलपीजी आपूर्ति ऑनलाइन प्रणाली से नियंत्रित होती है, जिससे जमाखोरी की संभावना कम रहती है। उन्होंने बताया कि बद्दी, ऊना और अंबाला स्थित बॉटलिंग प्लांट से सिलेंडरों की आपूर्ति जारी है, हालांकि परिवहन संबंधी देरी के कारण कभी-कभी हल्की कमी महसूस हो सकती है।

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