पटना , अप्रैल 26 -- खिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स)पटना के न्यूरोसर्जरी विभाग ने बिहार न्यूरोसर्जरी सोसाइटी और एसोसिएशन ऑफ़ नॉर्थ ईस्टर्न न्यूरोसाइंटिस्ट्स ऑफ़ इंडिया के सहयोग से 25-26 अप्रैल 2026 को "न्यूरोवैस्कुलर अपडेट पटना 2026" का सफलतापूर्वक आयोजन किया। इस कॉन्फ्रेंस में ब्रेन हेमरेज और स्ट्रोक से पीड़ित मरीज़ों को हाइब्रिड टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से पूरी और आधुनिक इलाज देने की तत्काल ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया।
इस कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो. (डॉ.) ब्रिगेडियर राजू अग्रवाल ने किया, जिन्होंने इस क्षेत्र में न्यूरोवैस्कुलर देखभाल को बेहतर बनाने के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला।
दुनिया भर के जाने-माने विशेषज्ञों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि आधुनिक न्यूरोवैस्कुलर देखभाल के लिए माइक्रोसर्जिकल और एंडोवैस्कुलर दोनों तकनीकों में दोहरी विशेषज्ञता की ज़रूरत होती है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि मरीज़ों के बचने की संभावना को बेहतर बनाने के लिए हाइब्रिड ऑपरेटिंग थिएटर बनाना बहुत ज़रूरी है, खासकर "गोल्डन आवर" यानी लक्षणों के शुरू होने के चार घंटे के अंदर के दौरान, जब इलाज के नतीजों को काफ़ी हद तक बेहतर बनाया जा सकता है।
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