भुवनेश्वर , दिसंबर 11 -- ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले के 37 साल के एक व्यक्ति को एंकिलोसिंग स्पॉन्डिलाइटिस बीमारी से मुक्ति मिली है। एम्स भुवनेश्वर में तीन जटिल ऑर्थोपेडिक सर्जरी के बाद उन्हें नई जिंदगी हासिल हुई।
एम्स भुवनेश्वर ने बताया कि लगभग दो दशकों से बीमारी से पीड़ित मरीज बिश्वभूषण राउत की रीढ़ और दोनों कूल्हे पूरी तरह से आपस में जुड़ गए थे, जिससे एक गंभीर और कठोर विकृति आ गई थी।
मरीज की तकलीफ का अंदाजा हम इस बात से लगा सकते हैं कि उसकी धड़ गर्दन से लेकर कूल्हों तक झुकी हुई थी और वह हिल-डुल नहीं सकता था। इससे उनकी रीढ़ और जांघों के बीच लगभग 150-डिग्री का कोण बन गया था, जिससे उनकी ठोड़ी जांघों के करीब आ गई थी। इस स्थिति के कारण उनका चलना, बैठना और यहां तक कि सोना भी बहुत मुश्किल हो गया था।
मामले की जटिलता और पैरालिसिस सहित अप्रत्याशित जटिलताओं के जोखिम के कारण ओडिशा के कई अस्पताल और भारत के अन्य प्रमुख संस्थान उनका इलाज करने में असमर्थ थे। उनकी माली हालत भी उन्हें उच्च-स्तरीय निजी स्वास्थ्य सेवा केंद्रों तक पहुंचने से रोक रही थी।
मरीज के जीवन में नाटकीय मोड़ तब आया जब उन्होंने एम्स भुवनेश्वर के ऑर्थोपेडिक्स विभाग से संपर्क किया। एम्स में डॉ. दीपक नेराडी ने विभाग के प्रमुख डॉ. बिष्णु प्रसाद पात्रो के मार्गदर्शन में यह मामला अपने हाथ में लिया। डॉ. नेराडी ने डॉ. गुरुदीप दास के साथ मिलकर न्यूरोमॉनिटरिंग, बोन स्कैल्पेल, हाई-स्पीड बर्र और सर्जिकल माइक्रोस्कोप जैसे उन्नत चिकित्सा उपकरणों का उपयोग करके द्विपक्षीय कूल्हे प्रतिस्थापन और रीढ़ की हड्डी की विकृति सुधार सर्जरी सफलतापूर्वक की।
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