पटना , फरवरी 25 -- अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) पटना के अस्पताल प्रशासन विभाग ने बुधवार को अग्नि सुरक्षा, अस्पताल निकासी योजना एवं आपदा लॉजिस्टिक्स प्रबंधन पर एक विशेष व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित किया।
यह कार्यक्रम भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ द्वारा हेल्थ सेक्टर डिजास्टर प्रिपेयर्डनेस प्रोग्राम के अंतर्गत वित्तपोषित था। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य संस्थानों को आपदा की किसी भी स्थिति में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया के लिए सक्षम बनाना है।
अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा और अस्पताल निकासी योजना पर आयोजित इस विस्तृत व्याख्यान के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय अग्नि सेवा महाविद्यालय के निदेशक नागेश सिंघाने ने कहा कि अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा केवल तकनीकी विषय नहीं बल्कि संवेदनशील मानवीय जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आईसीयू, नवजात यूनिट्स, ऑपरेशन थिएटर, ऑक्सीजन आपूर्ति प्रणाली और जटिल विद्युत नेटवर्क जैसे क्षेत्रों में जोखिम की संभावना अधिक होती है इसलिए तैयारी भी उतनी ही मजबूत होनी चाहिए।
श्री सिंघाने ने जोर देकर कहा कि अग्नि सुरक्षा को "चेकलिस्ट" से आगे बढ़ाकर "संस्थान की संस्कृति" बनाना होगा। जोखिम क्षेत्रों की पहचान, उपकरणों की नियमित जांच, फायर अलार्म और अग्निशमन तंत्र की सक्रियता, स्पष्ट कमांड सिस्टम और नियमित मॉक ड्रिल को उन्होंने जीवन रक्षक उपाय बताया। उन्होंने विशेष रूप से यह रेखांकित किया कि अस्पताल की निकासी योजना विभागवार, समयबद्ध और निरंतर अद्यतन होनी चाहिए, जिससे आपातकाल में भ्रम की स्थिति न बने।
कार्यक्रम में आपदा लॉजिस्टिक्स प्रबंधन पर भी चर्चा हुई। ग्रुप कैप्टन (डॉ.) इन्नायथ कबीर, एयर फोर्स मुख्यालय, नई दिल्ली ने संसाधनों की पूर्व योजना, आपातकालीन भंडारण, अतिरिक्त बेड क्षमता (सर्ज कैपेसिटी), स्पष्ट संचार व्यवस्था और जिम्मेदारियों के स्पष्ट निर्धारण को प्रभावी आपदा प्रबंधन की रीढ़ बताया। उन्होंने कहा कि आपदा के समय सबसे बड़ा हथियार समन्वित तैयारी और त्वरित निर्णय है।
कार्यक्रम में बढ़ती आपदा प्रबंधन आवश्यकताओं, कानूनी प्रावधानों और आधुनिक आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणालियों पर भी प्रकाश डाला गया। प्रतिभागियों को यह संदेश दिया गया कि प्रशिक्षण और अभ्यास ही वास्तविक आपदा के समय आत्मविश्वास और दक्षता प्रदान करते हैं।
इस अवसर पर प्रो. (ब्रिग.) डॉ. राजू अग्रवाल, कार्यकारी निदेशक; प्रो. डॉ. अनूप कुमार, चिकित्सा अधीक्षक; प्रो. (डॉ.) रुचि सिन्हा, डीन (स्टूडेंट्स अफेयर्स); तथा डॉ. सुजीत सिन्हा, पाठ्यक्रम समन्वयक एवं विभागाध्यक्ष, अस्पताल प्रशासन सहित तीन राज्यों के स्वास्थ्य प्रशासक, फैकल्टी सदस्य, रेजिडेंट डॉक्टर, नर्सिंग अधिकारी, इंजीनियर, सुरक्षा कर्मी और अन्य कर्मचारी उपस्थित थे।
संवादात्मक सत्र में प्रतिभागियों ने सक्रिय भागीदारी करते हुए आपातकालीन परिस्थितियों में अपनी भूमिकाओं को स्पष्ट किया और व्यावहारिक सुझाव साझा किए।यह पहल दर्शाती है कि एम्स पटना केवल उपचार का केंद्र नहीं बल्कि एक ऐसी सुदृढ़ और सजग स्वास्थ्य प्रणाली का निर्माण कर रहा है जहाँ सतर्कता संस्कृति है, तैयारी निरंतर है और हर जीवन की सुरक्षा सर्वोच्च प्रतिबद्धता है।
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