जोधपुर , अप्रैल 02 -- एम्स जोधपुर राजस्थान का एकमात्र अस्पताल और देश का दूसरा एम्स है जहां दुर्लभ 'लाफिंग एपिलेप्सी' के लिए उन्नत सर्जरी की जाने लगी है।
आधिकारिक सूत्रों ने गुरुवार को बताया कि एम्स जोधपुर ने एक महत्वपूर्ण चिकित्सीय उपलब्धि हासिल करते हुए हाइपोथैलेमिक हैमार्टोमा से होने वाले जेलास्टिक सीजर्स (लाफिंग एपिलेप्सी) से पीड़ित चार मरीजों का सफलतापूर्वक न्यूनतम इनवेसिव स्टीरियोटैक्टिक रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन सर्जरी द्वारा उपचार किया है। यह मिर्गी का एक दुर्लभ और दवाओं से नियंत्रित न होने वाला प्रकार है।
सर्जरी से पहले इनमें से कुछ बच्चों को प्रतिदिन 10 से 20 तक दौरे आते थे, जिससे उनके जीवन की गुणवत्ता पर गंभीर प्रभाव पड़ता था। उन्नत कंप्यूटर गाइडेड स्टीरियोटैक्टिक फ्रेम आधारित तकनीक का उपयोग करते हुए चिकित्सकों ने मस्तिष्क के गहरे हिस्से में स्थित दौरे उत्पन्न करने वाले ऊतक को करीब एक इंच के छोटे चीरे के माध्यम से अत्यंत सटीकता के साथ लक्षित करके नष्ट किया, जिससे ओपन ब्रेन सर्जरी की आवश्यकता नहीं पड़ी।
सभी मरीजों ने सर्जरी के बाद बेहतर प्रतिक्रिया दी और किसी भी प्रकार की जटिलता सामने नहीं आई। उन्हें 48 घंटे के भीतर सुरक्षित रूप से अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और अब वे पूरी तरह से दौरे मुक्त हैं, जो इस उन्नत न्यूनतम इनवेसिव तकनीक की प्रभावशीलता और सुरक्षा को दर्शाता है। इस उपलब्धि के साथ एम्स जोधपुर राजस्थान का एकमात्र अस्पताल और देश का दूसरा एम्स बन गया है, जहां यह अत्यधिक विशेषीकृत उपचार उपलब्ध है।
इन मरीजों का न्यूरोलॉजिकल मूल्यांकन एवं प्री सर्जिकल आकलन डॉ सम्हिता पांडा एवं डॉ लोकेश सैनी द्वारा किया गया, जबकि उन्नत एमआरआई लोकेलाइजेशन डॉ सरबेश तिवारी ने किया। एनेस्थीसिया सहयोग डॉ स्वाति छाबड़ा एवं डॉ मनबीर कौर द्वारा प्रदान किया गया तथा सर्जरी डॉ मोहित अग्रवाल द्वारा सफलतापूर्वक की गई।
एम्स जोधपुर में वर्ष 2019 से व्यापक मिर्गी सर्जरी कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है, जिसके तहत अब तक 100 से अधिक मिर्गी सर्जरी सफलतापूर्वक की जा चुकी हैं। यह सभी सर्जरी आयुष्मान भारत योजना के तहत निःशुल्क की गई हैं, जिससे क्षेत्र के मरीजों को उन्नत उपचार सुलभ हो सका है।
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