ऋषिकेश , अप्रैल 12 -- उत्तराखंड में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश के आई बैंक ने नेत्रदान के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए कुल 1246 नेत्रदान (कॉर्निया संग्रह) का आंकड़ा पार कर लिया है। हाल ही में दिवंगत सुरेंद्रवती, सुदेश कुमारी और राहुल पंवार के परिजनों द्वारा किए गए नेत्रदान से इस संख्या में वृद्धि हुई है। इस पहल से छह से आठ दृष्टिबाधित व्यक्तियों को नई दृष्टि मिलने की संभावना बनी है।
एम्स की कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) मीनू सिंह ने दानदाता परिवारों के इस सराहनीय कदम की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे प्रेरक उदाहरण समाज में नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए आई बैंक की टीम को भी बधाई दी।
नेत्र रोग विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) संजीव कुमार मित्तल ने बताया कि नेत्रदान की प्रक्रिया अत्यंत सरल है और लगभग 15 मिनट में पूरी हो जाती है। उन्होंने कहा कि किसी भी आयु वर्ग का व्यक्ति, चाहे वह चश्मा पहनता हो या मोतियाबिंद की सर्जरी करा चुका हो, नेत्रदान कर सकता है।
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