गोरखपुर , मार्च 20 -- महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय में एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) पर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन शुक्रवार को विभिन्न तकनीकी सत्रों में विषय के आणविक, नैदानिक और पर्यावरणीय पहलुओं पर चर्चा की गई।

विशेषज्ञों ने एएमआर को तेजी से उभरता वैश्विक स्वास्थ्य संकट बताते हुए एंटीबायोटिक दवाओं के दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इससे जीवाणु प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं, जिससे उपचार जटिल हो जाता है। वक्ताओं ने एएमआर नियंत्रण के लिए सुदृढ़ एंटीबायोटिक नीति, परीक्षण आधारित दवा उपयोग और वैकल्पिक उपचार पद्धतियों की आवश्यकता पर बल दिया।

संगोष्ठी में माइक्रोबायोम आधारित उपचार, पर्यावरणीय प्रदूषण और अस्पताल अपशिष्टों के प्रभाव जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया। अंत में प्रतिभागियों ने अपने शोध प्रस्तुत किए और विभिन्न वैज्ञानिक पहलुओं पर चर्चा की।

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