शिमला , मार्च 25 -- सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के प्रदर्शन को बढ़ाने और तेज करने के उद्देश्य से शुरू किये गये कार्यक्रम 'रैम्प' के तहत हिमाचल प्रदेश के अधिकारियों, मंत्रियों के विदेशी दौरों पर सवाल उठने शुरू हो गये हैं। आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि तत्काल औद्योगिक निवेश के मामले में इन दौरों के सीमित प्रत्यक्ष परिणाम मिले हैं।

यह मुद्दा प्रश्नकाल के दौरान विधानसभा सदस्य बिक्रम सिंह द्वारा उठाया गया, जिन्होंने सरकार से विदेशी दौरों पर खर्च की गई राशि का विवरण प्रस्तुत करने को कहा।

इस प्रश्न का उत्तर देते हुए उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि सरकार ने प्रतिनिधिमंडलों में भाजपा विधायक अनिल शर्मा को भी शामिल किया था और विपिन सिंह परमार को भी आमंत्रित किया गया था लेकिन वह उनमें शामिल नहीं हो सके।

पिछले तीन वर्षों में 31 जनवरी 2026 तक केवल एक बड़ा विदेशी दौरा किया गया था। उद्योग मंत्री के नेतृत्व में 13 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने 29 सितंबर से 10 अक्टूबर 2025 के बीच जापान, हांगकांग और वियतनाम का दौरा किया था।

प्रतिनिधिमंडल में पांच वरिष्ठ सरकारी अधिकारी -आर.डी. नज़ीम (अतिरिक्त मुख्य सचिव, उद्योग), डॉ. यूनुस (उद्योग निदेशक), तिलक राज शर्मा (अतिरिक्त निदेशक), अंशुल धीमान और अनिल ठाकुर (संयुक्त निदेशक) के साथ तीन विधायक तथा अर्न्स्ट एंड यंग के एक सलाहकार और तीन उद्योगपति शामिल थे।

इस दौरे पर सरकारी खजाने से 2.04 करोड़ रुपये खर्च हुए, जिसे केंद्र प्रायोजित रैम्प (आरएएमपी) योजना के तहत वित्त पोषित किया गया था। गौरतलब है कि इस अवधि के दौरान 'इन्वेस्ट इंडिया' पहल के तहत किसी भी कर्मचारी या अधिकारी को विदेश नहीं भेजा गया।

सरकार ने स्पष्ट किया कि यह दौरा मुख्य रूप से एक 'एक्सपोज़र विज़िट' था, जिसका उद्देश्य सीधे निवेश सुरक्षित करने के बजाय वैश्विक सर्वोत्तम विधियों को समझना और एमएसएमई पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना था।

अधिकारियों ने अप्रत्यक्ष परिणामों का दावा किया है। दौरे के बाद राज्य ने शिमला में 'हिम फेस्ट-2026' की मेजबानी की थी। इस आयोजन के दौरान लगभग 10,000 करोड़ रुपये के प्रतिबद्धता ज्ञापनों (मेमोरेंडम ऑफ कमिटमेंट) पर हस्ताक्षर किए गए, जबकि 2,500 करोड़ रुपये के प्रस्ताव वर्तमान में विचाराधीन हैं।

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